नयी दिल्ली, 4 नवंबर, नससे. महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत अन्ना हजारे ने शुक्रवार को अपना मौन व्रत तोडऩे के बाद अचानक रुख बदलते हुए ऐलान किया कि अगर संसद के शीतकालीन सत्र में संप्रग सरकार ने उनका जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं किया तो वह उन पांच राज्यों में काग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे जहा अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

सुबह राजघाट पर महात्मा गाधी की समाधि के समक्ष अपने 19 दिन के मौन व्रत को तोडऩे के बाद संवाददाता सम्मेलन में आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए हजारे ने कहा कि कोई जो भी कहे, कहता रहे. मैं अपमान सहता आया हूं. पहले मैंने फैसला किया था कि मैं किसी भी पक्ष या पार्टी के खिलाफ प्रचार नहीं करूंगा.

अगर संसद के शीतकालीन सत्र में हमारा विधेयक पारित नहीं हुआ तो मैं पाचों राज्यों का दौरा कर जनता से कहूंगा कि काग्रेस को वोट मत दो. हजारे ने कहा, मैं संसद सत्र के अंतिम दिन तक इंतजार करूंगा. अगर विधेयक पारित नहीं हुआ तो तीन दिन का अनशन करूंगा. इसके बाद देश भर के प्रदेशों और विशेषकर इन पाच राज्यों [जहा विधानसभा चुनाव होने हैं] का दौरा करूंगा.

वहां एक दिन का धरना दूंगा और जनसभाएं कर जनता को ऐसी पार्टी के खिलाफ जागरूक करूंगा जिसने लोकपाल गठित नहीं किया है. गाधीवादी कार्यकर्ता ने उत्तराखड के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खडूड़ी की दिल खोलकर तारीफ की लेकिन दिलचस्प रूप से यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में काग्रेस ने जहा ग्रेजुएशन किया है, वहीं भाजपा ने डॉक्टरेट पाई है. उन्होंने कहा, मैं भाजपा के पक्ष में बिल्कुल नहीं हूं. खडूडी की इसलिए तारीफ कर रहा हूं क्योंकि उन्होंने विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक पारित कराते हुए शानदार और दिलेरी वाला काम किया है.

भ्र्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर कड़े तेवर अपनाते हुए कहा है कि सख्त लोकपाल विधेयक बनाने के मुद्दे पर सरकार की नीयत साफ नहीं है. वह लोकपाल को कमजोर करने का प्रयास कर रही है.उन्होंने कहा कि जनलोकपाल के सभी मसौदे को बांटकर पेश कर रही है. अन्ना ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार की सख्त लोकपाल बनाने की मंशा ही नहीं है. इसलिए बार-बार जनलोकपाल के बारे में दुहराया जा रहा है.

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