भारत से जाकर विदेशों में बसे भारतीयों के लिए हम हर वर्ष प्रवासी भारतीय सम्मेलन कर रहे हैं. वे भी यहां आकर बड़ा सुखद महसूस करते हैं. लेकिन यह बड़ा दुखद भी है जब वे यहां आकर यह कहते हैं कि उन्हें उनके पूर्वजों के देश में शासन व अफसरों की लालफीताशाही व भ्रष्टाचार से बड़ी परेशानी होती है. केवल नीतियां बना देने से तो कुछ होता नहीं है यदि उनके अनुरूप कार्य न किया जाए. प्रवासी भारतीयों ने उन देशों में अपना और अपने मूलदेश का नाम बढ़ाया है. उनके पूर्वज तो यहां से अंग्रेजों द्वारा मजदूर बनाकर ले जाए गए थे, लेकिन अब वे वहां राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं. जयपुर में हो रहे इस 10वें प्रवासी सम्मेलन में मुख्य अतिथि ट्रिनीड्राड-टुबेगो देश की प्रधानमंत्री श्रीमती कमला प्रसाद बिसेसर हैं. इससे पूर्व वहां के प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडे थे. पास ही दक्षिण अमेरिका के पूर्वी राष्ट्र सूरीनाम के भारतीय मूल के श्री छेदी जगन प्रधानमंत्री थे. मॉरीशस में श्री शिवशंकर राम गुलाम व अनिरुद्ध जगन्नाथ राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री रहे. फिजी में श्री महेंद्र चौधरी प्रधानमंत्री थे. ये सभी भारतीय मूल के हैं और अपने देश को भूले नहीं हैं. ये लोग वहां सभी क्षेत्रों कृषि, उद्योग, व्यापार में साधन संपन्न हैं और भारत से जुड़े रहने के लिए यहां निवेश भी करना चाहते हैं. जयपुर सम्मेलन में आए निवेश के इच्छुक लगभग सभी प्रवासी भारतीयों का यही कहना है कि भारत में निवेश करना शासन की लाल फीताशाही व सुविधाओं का अभाव और भ्रष्टाचार के कारण बहुत मुश्किल है.

भारत सरकार ने प्रवासियों की सुविधा के लिए प्रवासी भारतीय कार्ड की व्यवस्था की है लेकिन इसको पाने में लाल फीताशाही के कारण एक प्रवासी को 4 महीने का समय लगा और भ्रष्टïचार के कारण उसके 400 डालर (20 हजार रु.) खर्च हो गए. ऐसे वातावरण में जहां इतना ज्यादा समय व रुपया केवल कार्ड पाने में लगता है वह सरकार की तमाम नीतियों के बाद भी यहां निवेश करने के लिये कैसे प्रोत्साहित होगा. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों को मताधिकार देने के लिये भारत के चुनावों में भाग लेने के लिये सरकारी अधिघोषणा जारी कर दी है कि जन-प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन किया जाए. जो प्रवासी भारतीय विदेशों में काम कर रहे हैं, उन्हें पेंशन व जीवन बीमा का लाभ दिया जायेगा. प्रवासियों के लिये कल्याण कोष भी बनाया जायेगा.

श्री सिंह ने कहा कि इस समय देश कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है. आर्थिक दर साढ़े आठ प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत आ रही है. लेकिन हमें विश्वास है कि हम इसे शीघ्र ही 9-10 प्रतिशत तक ले आयेंगे. 60 देशों से आये लगभग दो हजार प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रवासी भारतीय विभाग के केन्द्रीय मंत्री श्री वलियार रवि ने कहा कि जिन प्रवासी भारतीयों ने भारतीय दूतावासों में अपना पंजीयन करा लिया है वे जनवरी-फरवरी-मार्च में 5 राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव में मतदान कर सकेंगे. भारत में पूर्व फ्रान्सीसी क्षेत्रों पडुचेरी (पांडुचेरी) कराईकल, यमन, माहे में कई फ्रांसीसी नागरिक बसे हुए हैं, उन्हें फ्रान्स की सरकार ने मताधिकार दे रखा है और उनके लिये फ्रान्स सरकार यहां मतदान केन्द्र बनाती है. भारत की भावना है कि प्रवासी भारतीयों से अति घनिष्ठ संबंध बनाये रखे जायें. इस सम्मेलन में की व्यवस्था भी बहुत ही खराब रही. बहुत छोटे सभागार में इसे रखा गया जहां कुल 1500 लोग ही बैठ सकते हैं जबकि सिर्फ प्रवासी ही 2000 थे और इस अवसर पर भारतीयों को मिलाकर लगभग 5 हजार से ज्यादा लोग हो गये.

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