मध्यप्रदेश का ख्याति प्राप्त हिल्स स्टेशन पचमढ़ी जो कभी ग्रीष्मकालीन राजधानी भी रहा, इन दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से अस्तित्व के ही संकट में आ गया. अभी तक यही सिलसिला चल रहा था कि पचमढ़ी में पर्यटन का और ज्यादा विकास करना है. वहां होटल व रिसार्ट बन रहे थे. पर्यटक खासकर बंगाल से वहां बहुत आते रहे हैं. कई स्थान धूपगढ़, चौरागढ़, वी. फाल, महादेव, सिल्वर फाल दर्शनीय स्थल हैं. अब रिजर्व फारेस्ट के नाम पर और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कोर एरिया को केवल वन्य पशुओं के लिये ‘एक्सक्लूसिव’ रखने के लिये पर्यटकों के लिये पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक वज्रपात की तरह आया और पचमढ़ी का स्वरूप ही खत्म कर गया. इस मामले में यह तो नहीं कहा जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना की जाए. वह संभव भी नहीं होगा क्योंकि फैसले में ही कह दिया गया है कि यदि फैसले का उल्लंघन या अवहेलना पाई गई तो राज्य सरकारों को अवमानना का दोषी जानकर उस पर जुर्माना लगाया जायेगा. लेकिन यह तो किया ही जा सकता है कि पचमढ़ी का पर्यटन क्षेत्र और रिजर्व फारेस्ट एरिया अलग-अलग सीमांकित कर दिये जाए. वन्य पर्यटन व भ्रमण पर रोक का परिपालन हो और पचमढ़ी के पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिये यथावत खुला रखा जाए.
कभी जब बिजली युग नहीं था, पंखे, ए.सी. नहीं थे तब पचमढ़ी, शिमला, नैनीताल, दार्र्जिलिंग, महाबलेश्वर व  कोडर्ईकोनाल ग्रीष्म राजधानी हुआ करते थे. अब ये सभी आम जनता का सुलभ और सुविधाओं से परिपूर्ण पर्यटन नगर बन चुके है. हिल्स स्टेशन जाना भी एक बड़ा ही सुखद पर्यटन होता है. पचमढ़ी को इसीलिए सतपुड़ा की रानी का खिताब प्राप्त है. उसका अस्तित्व बना ही रहना चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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