जंगल की निराली दुनिया में एमपी के पन्ना ने रचा इतिहास

टाइगर रिजर्व से अरुणसिंह की विशेष रपट

पन्ना, 16 दिसम्बर . दुनिया भर के बाघ विशेषज्ञों व वन्य जीव प्रेमियों के लिए म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बहुत बड़ी खुशखबरी मिली है.

आठ माह पूर्व कान्हा से यहां पर लाई गई अनाथ पालतू बाघिन ने खुले जंगल में नैसर्गिक जीवन जीते हुए नन्हें शावकों को जन्म दिया है. पालतू बाघों को जंगली बनाने का पूरी दुनिया में यह पहला अनूठा प्रयोग था, जिसकी कामयाबी से जंगल की निराली दुनिया में एक नया आयाम कायम हुआ है. बाघ पुर्नस्थापना योजना के अन्तर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व की पालतू व अनाथ बाघिन को पन्ना लाया जाकर उसे 27 मार्च 2011 को खुले जंगल में स्वच्छन्द रूप से विचरण हेतु छोड़ा गया था. शुरूआती दिनों में इस पालतू बाघिन को जंगली जीवन अपनाने में तमाम तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, लेकिन 21 दिन गुजरने के बाद इस बाघिन ने मादा सांभर का शिकार कर अपना भोजन स्वयं हासिल करने में सफल हो गई. खुले जंगल में नैसर्गिक जीवन का लुत्फ उठाते हुए यह बाघिन पालतू से जंगली बन गई और जल्दी ही पन्ना टाइगर रिजर्व के इकलौते बाघ से इसकी मुलाकात हो गई. तभी से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि कान्हा की यह बाघिन नन्हें शावकों को जन्म देकर एक नया इतिहास रच सकती है. यह उम्मीद तब हकीकत बन गई जब मड़ला वन परिक्षेत्र के जंगल में एक नन्हें शावक के साथ इस बाघिन को कल देखा गया. पन्ना टाइगर रिजर्व के एक चौकीदार ने सबसे पहले यह दिलकश नजारा देखा और यह खुशखबरी क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति को दी. बाघिन ने बैल का शिकार भी किया है, जिसे खाने के बाद वह शावकों के साथ मांद में बैठी है. बाघिन ने कितने शावकों को जन्म दिया है, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है लेकिन ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि शावकों की संख्या चार हो सकती है. पार्क प्रबंधन द्वारा इस खुशखबरी से वरिष्ठï अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है.

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