पाकिस्तान अमेरिका के संबंधों मे एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को अमेरिका द्वारा एकतरफा कार्यवाही में मार दिये जाने के कारण से भारी तनाव चल रहा है. लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सैन्य व्यवस्था दोनों ही अमेरिका से इस तरह लिप्त और गुथी हुई हैं कि पाकिस्तान उस देश से अलग नहीं हो सकता. लेकिन इस घटना के बाद से वह चीन के और निकट जाना चाहता है. वर्तमान परिस्थितियों में वह चीन को अमेरिका के विकल्प के रूप में पाना चाहता है.

इसी तनावपूर्ण वातावरण में एक और गंभीर तनाव उस समय जुड़ गया जब पाक-अफगान सीमा पर तालिबानियों पर अमेरिकी हवाई हमले में नाटो सेनाओं द्वारा पाक सीमा में दो सैनिक चौकियों पर हमला हो गया और 28 पाकिस्तानी सैन्य कर्मी मारे गए. ओसामा बिन लादेन के समय पाकिस्तान कुछ भी इसलिये नहीं कर पाया क्योंकि वह हमेशा यह कहता रहा कि लादेन उसके देश में था उसकी जानकारी में नहीं है. एबटाबाद कांड के बाद भी उसने कहा कि उसे उसके वहां छिपे होने की जानकारी नहीं थी. इस समय नाटो हमले के कारण वह घरेलू उन्माद को शांत करने के लिए कुछ न कुछ करने को बाध्य है. उसने पाकिस्तान की सीमा में अफगानिसस्तान से तैनात नाटो सैनिकों के लिए सभी तरह की आपूर्ति रोक दी. साथ ही अमेरिका से 15 दिन के अंदर शम्मी हवाई अड्डा खाली करने को कहा है. इस अड्डे से नाटो वायुसेना अफगानिस्तान में तालिबानियों के अड्डों पर ड्रोन हमले करती हैं. पाकिस्तान प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि अब दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं रहेंगे. पाकिस्तान अमेरिका से अपने संबंधों की समीक्षा कर रहा है.

अमेरिका की ओर से यह कहा जा रहा है कि यह घटना एक दुर्घटना है और हमला गैर इरादतन है. इस तरह की घटनाएं दुर्भाग्य से घट जाती हैं. यह नाटो फौजों का पाक पर हमला नहीं है. पाकिस्तान तर्क की दृष्टि से इसे जानते हुए भी अपने देश में जनउन्माद को देखते हुए मान नहीं पा रहा है. उसकी यह भी मजबूरी है कि वह अमेरिका से संबंध तोड़ भी नहीं सकता. इन दिनों चीन और अमेरिका के बीच भी प्रशांत महासागर में सैन्य प्रभुता को लेकर टकराव बहुत बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति श्री ओबामा ने हाल ही में आस्ट्रेलियाई दौरे में चीन को चेतावनी दी है कि अमेरिका प्रशांत क्षेत्र में सैन्य शक्ति के रूप में मौजूद है और वह इसे बनाये रखेगा. पाकिस्तान और चीन दोनों यह मान ही रहे हैं कि इन दिनों भारत और अमेरिका एक दूसरे के बहुत ही करीब हैं. चीन और पाकिस्तान से टकराव भारत और अमेरिका के बीच सैन्य व असैन्य दोनों प्रकार के संबंधों को और प्रगाढ़ बना देगा. चीन ने अमेरिका पर यह आरोप लगाया है कि वह प्रशांत क्षेत्र में उसके और दूसरे देशों के बीच फूट डाल रहा है. चीन की महत्वाकांक्षा भी प्रशांत में शक्ति बनने की है. जिसे जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, ताइवान व दक्षिण पूर्व के देशों वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर, चीन को प्रशांत सागर की ताकत नहीं बनने देना चाहते.

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