भोपाल, 2 सितम्बर. मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ प्रजाति को फिर से बसाकर कर न केवल देश में बल्कि विश्व के समक्ष एक मिसाल पेश की  गई है.

वन विभाग के सारे प्रयासों के बावजूद यहां वर्ष 2009 के प्रारंभ में बाघ प्रजाति समाप्त हो गई थी. विभाग ने रिजर्व में बाघ प्रजाति को फिर से बनाने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की. आज यहा पांच वयस्क और 13 बाघ शावक हैं. इस सफल नवाचार के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया है.

आज यहां आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अभी तक माना जाता था कि बाघ प्रजाति को किसी नए क्षेत्र में स्थापित किया जाना लगभग असंभव है .अब तक विभाग द्वारा पन्ना में चार मादा तथा एक नर बाघ को अन्य क्षेत्रों से लाकर छोड़ा गया है तथा वे सफलतापूर्वक यहां स्थापित हो गए हैं. इनमें से तीन बाघिनों द्वारा शावकों को जन्म दिया जा चुका है. तीसरी बाघिन ने किंवदंती को ही झुठला दिया है. आमतौर पर यह माना जाता है कि मानव द्वारा पाले गये बाघों को वनों में रहने का कौशल सिखाना संभव नहीं है किन्तु यह बाघिन बाडे में पाली गई है. इसने प्रमाणित कर दिया है कि मनुष्य द्वारा पाले गये बाघों को न केवल वनों में स्थापित किया जा सकता है बल्कि ऐसी बाघिन शावकों को भी जन्म दे सकती है.

घटती जा रही देश की हरियाली

नई दिल्ली. धरती को हरा -भरा रखने के लिए वन क्षेत्र बढ़ाने के केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के तमाम प्रयासों के बावजूद पिछले दो वर्षों में देश में जंगल बढऩे की बजाय और कम हो गए हैं.

देहरादून स्थित वन सर्वेक्षण विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में सात लाख 82हजार 900 हेक्टेयर भूभाग में वनक्षेत्र है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 23.8.प्रतिशत है.यह इससे एक वर्ष पहले के मुकाबले 367 वर्ग किलोमीटर कम है. देश के कुल वन क्षेत्र का एक चौथाई हिस्सा रखने वाले पूर्वोत्तर राज्यों तथा केरल समेत कुछ दक्षिणी राज्यों में वन आच्छादन में कमी आयी है. इस दौरान पहाडी क्षेत्रों में 548 वर्ग किलोमीटर तथा जनजातीय बहुल जिलों में 679 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कम हो गया है .

रिपोर्ट के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में झूम कृषि के कारण वन क्षेत्र में कमी आई है जबकि केरल आदि राज्यों में यूकेलिप्टस, अकासिया मैगियम और रबड जैसे कम आयु वाले पेडों की कटाई के कारण जंगल कम हो गये . वर्ष 20की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान मैंगाव यानी कच्छ वनस्पति में 23.24 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है . कुल एक लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में बंसवारी है तथा कुल वन क्षेत्र में कार्बन स्टाक 666.3 करोड टन है. वन सर्वेक्षण विभाग उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों और आंकडों का अत्याधुनिक तकनीक से विश्लेषण करके हर दो वर्ष पर देश में वन की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट जारी करता है. इसकी पहली रिपोर्ट 1987 में जारी हुई थी. वर्ष 2009 की रिपोर्ट 2007-08 के आंकडों पर तथा 20की रिपोर्ट 200809 के आंकडों पर आधरित है.

मंत्रालय ने जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत हरित भारत मिशन के अंतर्गत 50 लाख हेक्टेयर भूमि को हरा -भरा करने का तथा इतने ही क्षेत्रफल के अतिरिक्त भूभाग के वनों का घनत्व बढाकर उनकी गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप इस काम के लिए राज्य सरकारों को 5000 करोड रूपये का अनुदान दिया है. उत्तर -प्रदेश , राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत 10 राज्यों में विदेशों से प्राप्त आर्थिक मदद से वनरोपण की तमाम गतिविधियां चलायी जा रहीं हैं.

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