भोपाल,12 सितंबर, नभासं. श्रमिक आदिवासी संगठन ने मध्यप्रदेश के बैतुल जिले में करीब पांच वर्ष पहले हुए चर्चित पारदी हत्या,बलात्कार और आगजनी कांड की जांच कर रही केन्द्रीय जांच ब्यूरों पर इस मामले के आरोपियो को बचाने के लिए सबूत मिटाने का आरोप लगाया है.

श्रमिक आदिवासी संगठन के अनुराग मोदी और पीडित महिला संगीता पारदी ने आज यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि बैतूल जिले के मुलताई में दस सितंबर 2007 को दस पारदी महिलाओं के साथ बलात्कार 11 सितंबर 2007 को डोंडेल बाई पारदी के साथ बलात्कार करने के बाद उसके पति बोंदरू पारदी की हत्या और इसके बाद चौथिया गांव में आगजनी व लूट की घटना हुई थी.

उन्होंने आरोप लगया कि उच्च न्यायालय के निर्देश और फोरेसिंग प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की 21 अगस्त 2009 को सीबीआई ने बलात्कार और हत्या के मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की. सीबीआई के जांच अधिकारियों ने कई बार प्रत्यदर्शियों के बयान दर्ज किए. प्रत्यदर्शियों ने अपने बयान में मासोद के तत्कालीन विधायक सुखदेव पांसे,भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा पवार अनुविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश साकल्ले को बलात्कार और हत्या करने का आरोपी बताया है. मोदी ने कहा कि बाद में सीबीआई के अधिकारी इन तीनों आरोपियों के नाम बयान से हटाने और बयान बदलने का दबाव बनाया.

जिसकी शिकायत प्र्रत्यदर्शियों ने समाजवादी जन परिषद के साथ मिलकर तत्कालीन सीबीआई निदेशक के कार्यालय में की गई.इसके आधार पर तत्कालीन सीबीआई जांच अधिकारी एम.एस.खान को हटाकर नया जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया. इसके बाद फिर से प्रत्यदर्शियों पर बयान बदलने का दबाव बनाया और इनके इंकार करने पर जांच अधिकारी ने फर्जी गवाहों के बयान पर उक्त तीन आरोपियों को बचाते हुए छह किसानों को आरोपी बना दिया और पिछले 12 अप्रैल को उच्च न्यायालय जबलपुर में जो चालान पेश किया गया उसमें दो वर्ष की जांच के सारे दस्तावेज गायब कर दिए.

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