नयी दिल्ली, 3सितंबर. कोयला ब्लाकों के आवंटन मामले में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग पर अडी भारतीय जनता पार्टी ने आज नौवें दिन भी संसद नहीं चलने दी हालांकि भारी हंगामे के बीच लोकसभा में तीन विधेयकों को ध्वनिमत से पारित किया गया.

एक बार स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे जैसे ही शुरू हुयी भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाते रहे. ये सदस्य प्रधानमंत्री गद्दी छोडो, प्रधानमंत्री इस्तीफा दो और कोयले की दलाली में पूरी कांग्रेस काली है… जैसे नारे लगा रहे थे. इस दौरान तीन विधेयक ध्वनिमत से पारित किये गये जबकि एक विधेयक चर्चा के लिये पेश किया गया. पारित किये जाने वाले विधेयक हैं  पूर्वोत्तर क्षेत्र, पुनर्गठन संशोधन विधेयक, 2011, महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिंग उत्पीडन से संरक्षण विधेयक 2010 तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण संशोधन विधेयक 2011.

सदन में हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिवैध और उनका पुनर्वास विधेयक 2012 को चर्चा के लिये पेश किया गया. राज्यसभा में सदन की कार्यवाही तीसरी बार दोपहर दो बजे शुरू होते ही भाजपा के सदस्य आसान के निकट आकर हंगामा करने लगे. इस बीच उपसभापति प्रो. पी.जे. कुरियन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  (संशोधन) विधेयक 2012 पारित कराने हेतु प्रस्ताव करने को कहा जिस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पी राजीव सहित अन्य सदस्य खडे होकर पहले इस पर चर्चा कराने की मांग करने लगे . इन दलों के कुछ सदस्य आसान के निकट भी आ गये थे. इस दौरान भाजपा सदस्यों का हंगामा जारी रहा और बाद में उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी.

लोकसभा में भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों के सदस्य प्रधानमंत्री के इस्तीफे को लेकर नारे लगाते रहे. शोर-शराबा रूकने की संभावना को नहीं देखते हुये अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिये स्थगित कर दी. इससे पूर्व सुबह ग्यारह बजे शोर शराबे के कारण लगातार नौवें दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका. लोकसभा में कार्यवाही की शुरुआत पूर्व सदस्य कांशीराम राणा को श्रद्धांजलि देने से हुई. इसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ भाजपा सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. इसी बीच तमिलनाडु के विभिन्न दलों के सदस्य भी श्रीलंका के रक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण देना बंद करने की मांग को लेकर अध्यक्ष के आसन के सामने शोरशराबा करने लगे.

राज्यसभा की कार्यवाही सुबह ग्यारह बजे शुरू होते ही भाजपा के सदस्य शोरशराबा करने लगे. इस वजह से प्रश्नकाल नहीं हो सका. सदन की कार्यवाही दोबारा 12 बजे प्रारम्भ हुई तो भाजपा, शिवसेना और अकाली दल के सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया. उपसभापति ने उत्तेजित सदस्यों को शांत करने की कोशिश की पर वे नहीं माने और शोर शराबा करते रहे. हंगामें के बीच सदन के पटल पर तीन केन्द्रीय मंत्रियों ने अपने बयान तथा रिपोर्ट आदि रखे. प्रो. कुरियन ने सदस्यों से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान . संशोधन. विधेयक 20.2 पारित कराने के लिए उस पर चर्चा कराने की अपील की पर वे नहीं तैयार हुए. इस बीच राजग के सांसद और तमिलनाडु के सांसद यह भी मांग करते रहे कि सरकार को श्रीलंका सेना को प्रशिक्षण देने का काम रोक देना चाहिए. हंगामें और शोरशराबे को देखते हुए प्रो. कुरियन ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी. बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी.

90 कोयला ब्लॉक खतरे में

कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर जारी विवाद के बीच कुल 90 कोयला ब्लॉक ऐसे हैं जिनका आवंटन रद्द होने का अंदेशा बना हुआ है. इन ब्लॉकों से उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हुआ है और ऐसे में ये जांच के घेरे में हैं. इनमें से 58 कोयला ब्लॉक तो ऐसे हैं जिनके भाग्य का फैसला तत्काल होना है. सरकार ने पहले ही इन 58 ब्लॉकों के आवंटन रद्द किए जाने के नोटिस भेज रखे हैं. इनमें से 33 ब्लॉकों का आवंटन सरकारी कंपनियों को और 25 का निजी क्षेत्र की कंपनियों को किया गया है. सूत्रों ने बताया कि अंतर मंत्रालयी समूह की और बैठकों में 32 अन्य ब्लॉकों पर विचार विमर्श होगा. इन 32 मामलों पर मंत्री समूह की पिछली बैठक में समीक्षा हुई थी. कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कल कहा कि ऐसा कोई भी ब्लॉक जिसका आवंटन गलत तरीके से हुआ है या फिर जिनमें उत्पादन शुरू नहीं हुआ है.

रद्द किया जा सकता है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पिछले एक दशक से अधिक में सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों को कुल 195 ब्लॉकों का आवंटन किया गया है. इनमें से सिर्फ 30 में उत्पादन शुरू हो सका है. संसद में हाल में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को बिना नीलामी के 57 खदानों के आवंटन से उन्हें 1.86 लाख करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया. अंतर मंत्रालयी समूह में विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं. समझा जाता है कि समूह ऐसे ब्लॉकों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश कर सकता है जिन्होंने विकास संबंधी दिशा-निर्देशों को पूरा नहीं किया है. सूत्रों ने कहा कि इन कंपनियों ने मंत्रालय को भेजे जवाब में कोयला ब्लॉकों का विकास न किए जाने के लिए कई कारण बताए हैं. इन कारणों में भूमि अधिग्रहण की समस्या, वन एवं पर्यावरणीय मंजूरी में देरी और कानून एवं व्यवस्था की समस्या आदि शामिल हैं.

उचित विकल्प नहीं दे रही भाजपा : खुर्शीद

सलमान खुर्शीद ने कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द किए जाने की मांग खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि संप्रग सरकार को इस मुद्दे पर गतिरोध दूर करने का कोई निष्पक्ष विकल्प नहीं दे रही है. संसद भवन परिसर में यहां आईएएनएस के साथ बातचीत में खुर्शीद ने कहा कि विपक्ष की मांग खुद से फांसी लगाने वाले किसी व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की पेशकश करने जैसी है.

खुर्शीद ने कहा कि वह जो कह रहे हैं वह कुछ ऐसा है कि अगर आप फांसी लगा लें, तो मैं आपका सम्मानजनक अंतिम संस्कार करूंगा. कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही भाजपा ने पिछले सप्ताह संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी और यह सिलसिला लगातार जारी है. लेकिन अब भाजपा ने थोड़ी नरमी दिखाते हुए कहा है कि यदि सभी आवंटन रद्द कर दिए जाएं और निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए जाएं तो वह संसद की कार्यवाही चलने देगी.

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