कोयला उपखंड आवंटनों पर सत्ता और विपक्ष की खींचतान में संसद के दोनों सदनों का मानसून सत्र व्यर्थ चला गया. 13 दिन कार्यवाही अवरोध में सत्र का सत्रावसान कर दिया गया. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि अब वे ही तय करें कि क्या संसद को न चलने देना विपक्ष का उचित कदम है. संसदीय व्यवस्था में सीएजी की रिपोर्ट पर सदन की लोकलेखा समिति व सदन विचार करती है. इसकी जगह आवंटन रद्द करने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग से जोड़कर संसद को ही ठप्प कर दिया.

सत्रावसान होने पर नेता विपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज व श्री लालकृष्ण आडवानी ने घोषणा की कि अब मामला संसद से सड़कों तक ले जाकर देश को भ्रष्टïाचार से मुक्त कराने की मुहिम चलाई जावेगी. दूसरी ओर कांग्रेस ने इस कांड को ओड़ीसा राज्य की विधानसभा में ले जाकर उसे नहीं चलने दिया और मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक के इस्तीफे की मांग कर डाली और सड़कों पर भी आ गए.

कोयला आवंटन में ओड़ीसा के मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह और झारखंड के मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा पर आक्षेप हैं. ये दोनों भारतीय जनता पार्टी के हैं और श्री पटनायक जनता बीजू जनता दल के हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह पर भी यह आरोप है कि उन्होंने रिलायन्स पावर हाउस के लिए कोयले का आवंटन मांगा था. ज्यादातर कोयला उपखंड छत्तीसगढ़, झारखंड व ओड़ीसा में राज्य सरकारों की अनुशंसा पर दिये गए हैं. सीबीआई इन तीनों मुख्यमंत्रियों से पूछताछ करेगी. सीएजी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर रिपोर्ट में ही आरोप लगाया है कि केंद्र ने जो कोयला उपखंड राज्य की मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन को दिया था वह उसने बहुत ही कम कीमत पर किसी निजी कम्पनी को दे दिया और राज्य को घाटा हुआ. केन्द्रीय मंत्री श्री सुबोधकांत सहाय व द्रमुक कोटे के मंत्री श्री जगत रक्षन पर भी ब्लाक आवंटन हथियाने के आरोप हैं.

इन आवंटनों पर सी.बी.आई. की जांच चल रही है और इन मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों से पूछताछ करेगी. भारतीय जनता पार्टी किसी निष्कर्ष से पहले ही प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है. इस संदर्भ में तो ओड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भी इस्तीफा दे देना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी इस नैतिकता को नकारते हुए इस बात पर भी चुप ही बनी हुई है कि पार्टी के राष्टï्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी ने भी किसी कम्पनी को ब्लाक दिलाया है.

भाजपा की अब आंदोलन को सड़कों तक ले जाने की घोषणा महज वर्ष 2014 में लोकसभा के चुनावों की तैयारी ही नजर आ रही है. उनकी दलीय राजनीति के लिये देश की संसद को कार्य नहीं करने देने का अक्षम्य अपराध कर डाला. आवंटन रद्द करना और प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगना दोनों ऐसी मांगें हैं जो संसद की कार्यविधि के ही विपरीत है. अब यह आंदोलन कांग्रेस द्वारा ओड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश में भी चलाया जाएगा. यहां भी विधानसभायें चलने नहीं दी जायेंगी और मुख्यमंत्रियों से इस्तीफे मांगे जायेंगे. सभी पर सी.ए.जी. के आरोप लगे हुए हैं. यह आंदोलन तो संसदीय प्रणाली को ही सड़कों पर लाकर खत्म करने का आंदोलन हो जायेगा. किसी भी बात को कभी भी मुद्दा बनाकर संसद व विधानसभाओं को चलने न दो और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्रियों का इस्तीफा तक अड़े रहो. इससे तो संसद व विधानसभायें ही अर्थहीन व व्यर्थ हो जायेंगी.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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