अब यह भी एक खबर है कि संसद चली. क्योंकि अब संसद चलती कम और रुकती ज्यादा है. संसद का एक पूरा सत्र ही जे.पी.सी. की मांग पर बन्द रहा था फिर लोकपाल का अड़ंगा आ गया. इस समय ऐसा लग रहा था कि रिटेल व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर भी संसद अवरोध बना रहेगा. विपक्ष और सरकार दोनों ही अपने-अपने रुख पर अड़े नजर आ रहे थे.

लेकिन इस पर कई मुख्यमंत्रियों का विरोध आ रहा था कि वे इसे अपने राज्य में लागू नहीं करेंगे. उनकी यह घोषणा उनके अधिकार क्षेत्र में भी आ रही थी. लेकिन मनमोहन सिंह की सरकार की सहभागी पार्टी की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विरोध सरकार को भारी पड़
रहा था. अन्तत: 7 दिसम्बर को स्थगित सदन की पुन: कार्यवाही शुरु होने से पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी संसद कार्यवाही शुरु होने से कुछ घंटे पहले सर्वदलीय बैठक की और फिर सदन में घोषणा कर दी कि एफ.डी.आई. को मुख्यमंत्रियों, राजनैतिक दलों, व्यापारियों आदि सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर आम सहमति के बाद ही इस मामले पर आगे बढ़ाया जायेगा. तब तक के लिये एफ.डी.आई. निर्णय रोका जाता है. विपक्ष की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज व अन्य विपक्षी दलों ने इसका स्वागत किया, इसे लोकतंत्र की जीत व सरकार का झुकना माना. इसके मुखर विरोध में उत्तरप्रदेश की बसपा सरकार की मुख्यमंत्री मायावती तमिलनाडु की अन्ना द्रमुक मुख्यमंत्री जयललिता और मध्यप्रदेश के श्री शिवराज सिंह चौहान उतर आये थे.

पिछले कई गतिरोधों से संसद का और सरकार का काम ठप्प पड़ा था. यह सत्र 22 नवम्बर से शुरु हुआ है और 21 दिसम्बर तक चलेगा. संसद में सरकार के 21 विधेयक विचारार्थ और पारित होने के लिये पड़े हैं. 23 विधेयक प्रस्तुत किये जाने हैं. इन सबसे ऊपर इसी सत्र में बहुचर्चित लोकपाल विधेयक भी प्रस्तुत होना है. इस विधेयक पर संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप एक-दो दिन में दे रही है. उसके बाद ही इसे सदन में प्रस्तुत किया जायेगा. अन्ना हजारे लगातार धमकियां और भपकियां दे रहे हैं कि यदि विधेयक उनकी मांग व आशा के अनुरूप न हुआ तो वे फिर से एक हफ्ते के लिए अनशन पर बैठेंगे. उसके बाद उन राज्यों में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करने निकल जायेंगे जहां विधानसभाओं के आम चुनाव होने जा रहे हैं. श्रीमती सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह इस मामले पर श्री अन्ना हजारे को आश्वस्त भी कर चुके हैं. चर्चा के दौरान प्रस्तुत विधेयक में संशोधन होने के संकेत मिल रहे हैं. संसद में सर्वदलीय बैठक में यह भी तय होना चाहिए कि विरोध की प्रणाली संसद को ठप्प करना नहीं होना चाहिए. अब संसद की अध्यक्ष व सभापति को भी यह मानना चाहिए कि उसका काम सदन को चलाना है उसे बार-बार स्थगित करना नहीं है. वे भी यह दृढ़-निश्चय कर लें कि चाहे जितना व जैसा हंगामा हो सदन की कार्यवाही स्थगित नहीं की जायेगी.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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