मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष की कांग्रेस के दो विधायक चौधरी राकेश सिंह और श्रीमती कमला पारुलेकर की सदस्यता अध्यक्ष का घेराव करने के संदर्भ में खत्म कर दी गई. अब वे विधायक नहीं रहे. यह दोनों ही कदम ‘अति’ की परिभाषा में आते हैं और सर्वमान्य वाक्योक्ति है कि ‘अति सर्वत्र वर्जित’. अति कहीं भी नहीं होनी चाहिए क्योंकि उसके परिणाम हमेशा ही घातक रहते हैं, लेकिन यह अति अब केन्द्र से लेकर राज्यों तक की विधानसभाओं में आ चुकी है.

मध्यप्रदेश में भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस विपक्ष में. केन्द्र में कांग्रेस नेतृत्व में साझा सरकार है और वहां भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में है. यहां भ्रष्टाचार के मामले को कांग्रेस सर पर उठाये है तो संसद में भ्रष्टïाचार के मामले पर भाजपा ने संसद का एक पूरा सत्र ही नहीं चलने दिया. जो सरकार वहां कहती रही वही सरकार यहां भी कह रही है कि संसद/विधानसभा को चलते दो हम मुद्दों पर चर्चा को तैयार हैं. लेकिन दोनो पक्षों के अलग-अलग रुख रहने से अवधान ज्यादा होता रहा और समाधान नहीं निकल पाया. वहां संसद का सत्र नहीं चला था और यहां विधानसभा सत्र का सत्रावसान हो गया. आने वाले चुनावों की भूमिका सभी जगह कुछ अतिरंजित राजनीति होती है. सबका टारगेट सत्ता होता है उनके लिये मुद्दे बनाये जाते है. भाजपा महापंचायतों में लगी है और कांग्रेस भ्रष्टïचार पर डट गई है. केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता श्री आडवानी ने तो भ्रष्टïचार पर रथयात्रा ही निकाल डाली. इस समय भ्रष्टïचार का मुद्दा केद्र में भाजपा और राज्य में कांग्रेस गर्माये हुए है. चुनाव आ रहे हैं. जो भी सामने आ जाये थोड़ा है.

 

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