दिसम्बर तक बनेंगी सभी शहरों की विकास योजनाएँ, नगरीय राजस्व सेवा का गठन शीघ्र

भोपाल, 9 सितंबर. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों को निर्देश दिये हैं कि वे शहरों को सुंदर और झुग्गीमुक्त बनाने विशेष ध्यान दें. उन्होंने शहरों में काम की तलाश में आये गरीब मजदूर लोगों के लिये कम लागत की आवास इकाइयों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि शहरों के लिये अधोसंरचना एवं विकास योजनाएँ बनाते समय भविष्य में होने वाले विस्तार को भी ध्यान में रखने की जरूरत है.

चौहान आज यहाँ स्थानीय नर्मदा भवन में कमिश्नर-कलेक्टर कांफ्रेंस में नगरीय प्रशासन, विकास एवं परिवर्तन सत्र को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी गरीबों का कल्याण राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और जिला प्रशासन को भी संवेदनशील होने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शहरों के विकास, सौंदर्य बढ़ाने एवं अधोसंरचना विकास के लिये पैसों की कोई कमी नहीं है. चौहान ने कलेक्टरों को निर्देश दिये कि वे स्थानीय बस स्टेण्ड और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने की पहल करें. नगरीय प्रशासन विभाग की भविष्य की कार्य-योजनाओं और वर्तमान परिदृृश्य के संबंध में बताया गया कि मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास कार्यक्रम में 110 शहर के लिये 1062 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं.

मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में 101 परियोजनाओं के लिये 3700 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है. सिंहस्थ के लिये 1423 करोड़ रूपये स्वीकृत किये जाने की जानकारी भी दी गयी. सभी शहरों में आधुनिक ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिये नगरों को डस्टबिन फ्री घोषित करने के लिये मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता कार्यक्रम शुरू किया गया है. अगले पाँच साल के लिये 278 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. पर्यटन विभाग के समन्वय से स्वच्छ भारत अभियान में दस शहर चुने गये हैं. शहरी परिवहन एवं यातायात विकास के लिये इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में बस परिवहन कंपनियाँ बनाई गई हैं. इन शहरों के लिये 569 बसों की खरीदी की जा रही है. राज्य स्तरीय एकीकृत नगरीय परिवहन परिषद का गठन किया गया है. परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं.

नगर विकास योजना
नगरों के सुनियोजित विकास के लिये सभी नगर निगम, नगर पालिका और पाँच पवित्र शहरों की नगर विकास योजनाएँ तैयार कर ली गई हैं. शेष 267 नगर के सिटी डेव्हलपमेंट प्लान इस साल दिसम्बर तक तैयार किये जा रहे हैं. शहरी गरीबों के लिये एक लाख से अधिक जनसंख्या के 24 शहर में 74 रैन बसेरे बनाये गये हैं और 26 बनाये जा रहे हैं. कलेक्टरों को निर्देशित किया गया कि वे इन रैन बसेरों के संचालन पर विशेष ध्यान दें.

सुशासन
कान्फ्रेंस में बताया गया कि नगरीय प्रशासन को सुदृृढ़ बनाने के लिये मध्यप्रदेश नगरीय वित्त एवं लेखा सेवा और मध्यप्रदेश नगरीय राजस्व सेवा का गठन किया जा रहा है. इसके अलावा जनसंख्या आधारित मापदण्डों पर नगर निगम और नगर पालिकाओं, परिषदों की माडल संरचना का कार्य जल्दी पूरा हो जायेगा. नगरीय निकायों के लिये वित्तीय मेन्युअल तैयार किया गया है. प्रयोग के बतौर नगर निगम भोपाल में नगरीय प्रशासन व्यवस्था को शुरू किया जा रहा है. शहरी क्षेत्र प्रबंधन, संभागीय कार्यालय और नगर निगमों को सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिये आपस में जोड़ा जा रहा है. यह कार्य 15 अक्टूबर तक पूरा हो जायेगा.

नगरीय निकायों द्वारा दी जाने वाली नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने के लिये आदर्श मानक निर्धारित कर दिये गये हैं. इनके आधार पर सेवाओं की गुणवत्ता की पहचान आसानी से की जा सकेगी. नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने नगरीय निकायों की यांत्रिक व्यवस्था में सुधार तथा नगरीय सड़कों के निर्माण, देखरेख की एक एजेंसी निर्धारित किये जाने का सुझाव दिया.

महत्वपूर्ण सुझाव
कान्फ्रेंस में सुझाव दिये गये कि निर्धारित सीमा से कम राशि के टेंंडर स्वीकार नहीं किये जाये. शहरों से लगे क्षेत्रों में विकसित हो रही कालोनियों के नियंत्रण, सड़कों के किनारे विद्युत व्यवस्था में बाधक वृक्षों की छटाई, होर्डिंग का व्यवस्थीकरण, उप नगरीय बाजारों का विकास, शहरों में उपलब्ध जमीन का निष्पादन, मल्टी स्टोरी भवनों की सरलीकृत अनुमति, बड़े शहरों के मुख्य स्थान पर सार्वजनिक प्रसाधन, वाटर-सीवरेज बोर्ड का गठन, ट्रेंचिग ग्राउंड की जगह कचरा संयंत्र लगाने, मध्यम क्षेत्रों के शहरों तक नगर परिवहन सेवा का विस्तार, बायपास बनाने, शहरी बस्तियों में भी मर्यादा अभियान चलाने, शहरों में आने वाले कामकाजी लोगों की आवासीय व्यवस्था और सेटेलाइट टाउन बनाने आदि सुझाव बैठक में दिये गये. कान्फ्रेंस में मंत्रीगण, मुख्य सचिव आर. परशुराम, संभागायुक्त और कलेक्टर उपस्थित थे.

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