सहयोगी दलों ने लगाई आर्थिक सुधारों पर मुहर

नई दिल्ली, 27 सितंबर. कांग्रेस कार्य समिति के बाद गुरुवार को सत्तारूढ संप्रग ने सरकार के हाल के कड़े आर्थिक फैसलों का समर्थन किया और सुधार की आवश्यकता पर चर्चा की .
कांग्रेस के बाद आज संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए बडे आर्थिक निर्णयों पर अपनी सहमति जाहिर कर दी. सरकार से तृणमूल कांग्रेस की विदाई के बाद पहली बार आयोजित हुई संप्रग की समन्वय समिति की बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई. बैठक के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में कहा कि सहयोगी दलों ने आर्थिक सुधारों को अपरिहार्य और अनिवार्य माना है.

वित्त मंत्री ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सहयोगी दलों से कहा कि निवेश के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अनेक उपाय करने होंगे. खुदरा बाजार में विदेशी कंपनियों के प्रवेश और डीजल की कीमत में बढोत्तरी के कारण सुश्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्र्रेस के हटने के परिप्रेक्ष्य में आज की बैठक हुई. साथ ही महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के निर्णय राजनीतिक गर्मायी हुई है. द्रमुक भी रिटेल एफडीआई के मुद्दे पर असहमति जाहिर कर चुकी है. लेकिन समझा जाता है कि बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई. वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि अब सरकार आर्थिक सुधारों की गति और तेज करेगी.

और अधिक सुधारों की जरूरतों पर विचार विमर्श किया गया. इस दिशा में जो विशिष्ट उपाय किए जाएंगे उन्हें कैबिनेट के सामने लाया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि अब सरकार दो प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देगी. खुदरा बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने का बडा निर्णय लेने के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बाहरी समर्थन से अस्तित्व बचाने में कामयाब रही सरकार अब बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत तक ले जानेस यौगिक कार्यों के लिए खेती की जमीन खरीदने से जुडे कानून को सरल बनाने के मकसद से भूमि अधिग्रहण विधेयक पास कराना चाहती है. सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों ने ही आज की बैठक में सहयोगियों को इन दोनों मामलों के बारे में इशारेतन अपनी मंशा जाहिर कर दी.

सहयोगी दलों ने डीजल और सिलंडर के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की आज हुई बैठक में सरकार को अपने सहयोगी दलों से मल्टी ब्रांड खुदरा बाजार में विदेशी कंपनियों के प्रवेश, डीजल की कीमत में वृद्धि और रसोई गैस सिलेंडर पर लगाई सीमा के मुद्दों जैसे टेढ़े सवालों का सामना करना पड़ा जबकि प्रधानमंत्र्री एवं वित्त मंत्री ने कडे आर्थिक निर्णयों को जरूरी और अपरिहार्य करार दिया. बैठक से बाहर आने पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में कहा कि सहयोगी दलों ने आर्थिक सुधारों को अपरिहार्य और अनिवार्य माना है लेकिन सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस की सरकार से विदाई के बाद सबसे बडे सहयोगी दल द्रमुक ने बैठक में कड़े तेवर दिखाए. सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के टी.आर. बालू ने खुदरा बाजार में विदेश कंपनियों के प्रवेश के अलावा डीजल की कीमत में बढोत्तरी का भी विरोध किया और रियायती सिलंडरों की संख्या 6 तक सीमित करने के निर्णय अस्वीकार्य बताया.

सूत्रों के अनुसार गठबंधन के दूसरे दलों ने देश की अर्थ व्यवस्था सुधारने के लिए आर्थिक सुधारों को जरूरी तो माना लेकिन उनका कहना था कि जनता का भरोसा भी बने रहना उतना ही जरूरी है. वित्त मंत्री ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सहयोगी दलों से कहा कि निवेश के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अनेक उपाय करने होंगे. खुदरा बाजार में विदेशी कंपनियों के प्रवेश और डीजल की कीमत में बढोत्तरी के कारण सुश्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्र्रेस के हटने के परिप्रेक्ष्य में आज की बैठक हुई. बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से कृषि मंत्री शरद पवार मौजूद थे और जाहिर तौर पर उनकी उपस्थिति से कांग्रेस नेतृत्व ने राहत की सांस ली क्योंकि महाराष्ट में एनसीपी के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार संकट में है और कांग्रेस के साथ उसके रिश्ते भी तनाव में हैं.

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