भोपाल, 2 सितंबर. प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय सिंह ने आज कहा कि खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध की वजह से विस्थापितों के प्रति राज्य सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए.

श्री सिंह ने यहां एक बयान में कहा कि डूब से प्रभावित आंदोलन कर रहे इन विस्थापितों की मांग पर राज्य सरकार तत्काल ध्यान दे. उन्होंने कहा कि विस्थापित पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर क्षेत्र में आंदोलन कर रहे हैं लेकिन उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने बांध में पानी के भराव के कारण उत्पन्न स्थिति की ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ध्यान आकर्षित करते हुए अनुरोध किया कि वह मांगों का निराकरण करें.

नर्मदा के पानी में कई दिनों से बैठे किसान

हरदा. जिले में बीते 10 दिन से एक अनोखा आंदोलन चल रहा है। इंदिरा सागर बांध के नजदीक बसे डेढ़ दर्जन गांवों के ग्रामीण पानी में धरने पर बैठे हैं। इन ग्रामीणों की तादाद 90 के करीब पहुंच गई है। दरअसल अदालत के आदेश के बाद बांध में पानी का लेवल बढाया जा रहा है। लेकिन पानी का ये बढ़ता लेवल ग्रामीणों के लिए दहशत की वजह बन गया है।

ग्रामीणों की मांग है कि न सिर्फ पानी का लेवल घटाया जाए बल्कि जो जमीनें डूब रही हैं उनके बदले जमीन दी जाए। दरअसल 19 गांवो के ये किसान इंदिरा सागर परियोजना का जल स्तर बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंदिरा सांगर बांध का जलस्तर बढ़ा कर 262.13 मीटर किया जा रहा है लेकिन पानी अभी 260 मीटर तक भी नहीं पहुंचा कि बैक वाटर डेढ़ दर्जन गांवों की सरहद पर हिलोरें लेने लगा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी 262 मीटर तक पहुंचा तो कई गांवों के डूबने का खतरा है। लिहाजा ग्रामीणों की मांग है कि पहले उनके लिए पर्याप्त इंतजाम किया जाए। नर्मदा घाटी के ग्रामीणों की नर्मदा घाटी विकास परियोजना से लड़ाई बीते दस साल से चल रही है। नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले फिर एकजुट हुए इन किसानों की मांग है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक उन्हें जमीन के बदले जमीन, और घर के बदले घर दिया जाए। डूब से प्रभावित होने वाले कई गांवों में आधे किसानों को मुआवजा मिला है, और आधे किसानों को नहीं मिला। फिलहाल प्रशासन इन नाराज किसानों को मनाने में जुटा है। लंबे समय से आश्वासनों के सब्जबाग देख रहे किसान अब भुलावे में आने को तैर नहीं। कई दिनों से लगातार चार-चार फिट पानी में उतरे किसानों के पैरों की त्वचा गलने लगी है। अधिकारी भी नांव के सहारे ही पानी में पहुंच कर आंदोलकारियों से बात कर पा रहे हैं। लेकिन ये मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के लिए भी शर्मिंदा करने वाली बात है कि किसानों को पानी में घुसे दस दिन हो गए हैं और उन्हें बाहर आने के लिए मनाया नहीं जा सका है।

 

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