भोपाल, 5 अक्टूबर. म.प्र. कर्मचारी कांग्रेस ने प्रदेश में विगत अनेक वर्षों से दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने की मांग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से की है. जिससे उन्हें भीषण महंगाई में परिवार के भरण पोषण में आर्थिक कठिनाईयों का सामना न करना पड़े.

संगठन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र खोंगल ने आज मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव दीपक खांडेकर को सौंपे ज्ञापन में अवगत कराया की प्रदेश के विभिन्न विभागों में 565 हजार 490 दैनिक वेतनभोगी कार्यरत थे. जिनमें से पूर्व वर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा 9 जनवरी 1990 को लिये गये निर्णयानुसार 22 हजार 544 दैनिक वेतन भोगियों की सेवाएं रिक्त पदों पर नियमित की जा चुकी है. लेकिन अब पद रिक्त नहीं होने के कारण 32 हजार 946 दैनिक वेतनभोगी आज भी सेवाएं नियमित न होने से 4 से पाँच हजार रुपये मासिक अल्पवेतन पर कार्य करते हुये सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

खोंगल ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में म.प्र. उच्च न्यायालय द्वारा कल डा. हरी सिंह गौर के केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर में कार्यरत दो सौ से अधिक दैनिक वेतनभोगियों के पक्ष में दिये गये राहतकारी निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसके तहत उन्हें वे जिस पद पर कार्यरत है, उस पद का न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश दिये गये है. राज्य शासन को चाहिये कि या तो नवीन पदों का निर्माण कर दैनिक वेतन भोगियों को एक मुश्त नियमित करें अथवा उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार उन्हें न्यूनतम वेतनमान स्वीकृत करें.

योजना आयोग का नवगठन की मांग:-
मध्यप्रदेश मेहनतकश मजदूर मोर्चा के महासचिव ए.डब्ल्यू. खान ने प्रेस विज्ञप्ति में जारी कर कहा है कि किसी भी देश की विकास उसकी योजनाओं पर निर्भर करता है, मगर हमारे देश का विकास की कल्पना अब दूर की बात लगती है. क्योंकि हमारे देश की योजना आयोग के सदस्यों का मानसिक संतुलन खराब हो गया है और यही कारण है कि देश में दिनों दिन बढ़ रही महंगाई के दौर में भी बढ़ती गरीबों की संख्या को कम करने के लिये खर्चे की राशि जो निर्धारण किया है उसके अनुसार शहरी क्षेत्र में 4,824 रु. तथा ग्रामीण क्षेत्र में 3,905 रु. मासिक खर्च करने वाला गरीब नहीं माना जा रहा है और इसी दलील को सही मानने के लिये उन्होंने देश की सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर अपने मानसिक बीमार होने का सबूत दे दिया है. मोर्चा के महासचिव मान सिंह, सक्रिय सदस्य ए.डब्ल्यू. खान, ओ.पी. सक्सेना, वहीद अहमद कुरैशी तथा सुभाष चौधरी आदि ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि राष्ट्र  हित में योजना आयोग के उपाध्यक्ष से लेकर सदस्यों तक का कार्यकाल तुरंत समाप्त किया जाये और योग्य सदस्यों की नियुक्ति कर राष्ट्र  विकास केलिये सही योजनाओं का निर्माण कराये.

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