लोकपाल पर राजनीति और गरमाई

नई दिल्ली, 30 दिसंबर, नससे. लोकपाल के मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनावो में भुनाने के लिए भाजपा कोर ग्रुप की बैठक हुई. पार्टी ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने के साथ-साथ सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला लिया है. बैठक में 3 जनवरी को राष्टï्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे जबकि 3 से 10 जनवरी तक देश भर में विरोध प्रदर्शन करेगी.

बैठक के बाद पार्टी महासचिव रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बैठक में राज्यसभा द्वारा किए गए आचरण पर चर्चा की गई. बैठक में 3 जनवरी को पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी व पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी की उपस्थिति में लोकपाल बिल के मुद्दे पर ज्ञापन सौपेंगे. श्री प्रसाद ने बताया कि 3 जनवरी से 10 जनवरी तक सभी प्रदेश मुख्यालयों में प्रदर्शन किया जाएगा. उन्होंने यह पखवाड़ा लोकतंत्र बचाओ कांग्रेस हटाओ अभियान के तहत चलाया जाएगा. बैठक में सभी नेताओं ने इसे जनता के बीच जोर-शोर से उठाने का फैसला लिया. पार्टी नेता अरूण जेटली ने कहा कि कोर ग्रुप में आगे की रणनीति पर विचार किया गया. दूसरी ओर पार्टी की दिल्ली प्रदेश इकाई ने भी सड़को पर केन्द्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया.

भाजपा की मंशा नहीं थी : चिदंबरम
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भाजपा की मंशा लोकपाल विधेयक पारित कराने की नहीं थी. इसलिए विपक्ष ने 187 संशोधन दिए.

बजट सत्र में आएगा बिल : बंसल
केंद्रीय मंत्री पी के बंसल ने कहा कि लोकपाल विधेयक संसद में बजट सत्र के दौरान विचार के लिए रखा जाएगा. गुरुवार को राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद आज शुक्रवार को बंसल ने सरकार की ओर से यह जानकारी दी. कल राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने से सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है. बंसल ने लोकपाल पर कहा कि हम सबके साथ बात करने के लिए तैयार थे लेकिन विपक्षी पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं थी. शीतकालीन सत्र में न्यायपालिका दायित्व विधेयक तथा लोकपाल विधेयक तो पारित नहीं हो सका पर कुल 17 विधेयक पारित किए गए. जिनमें लोकप्रहरी संरक्षण विधेयक, प्रसार भारती संशोधन विधेयक, जीवन बीमा निगम प्रमुख है जबकि खाद्य सुरक्षा विधेयक तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान सिटीजन चार्टर विधेयक. कंपनी विधेयक केवल पेश किया जा सका. केन्द्रीय संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया कि 22 नवंबर से 29 दिसंबर के बीच इस सत्र में कुल 30 विधेयक पेश किये गये जिनमें 27 लोकसभा में तथा तीन राज्यसभा में पेश किए गए. लोकसभा तथा राज्यसभा में 18-18 विधेयक पारित हुए पर दोनों सदनों में केवल 17 विधेयक ही पारित हो पाए.

लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक 2011 लोकसभा में पारित तो हुआ पर राज्यसभा में वह पारित नहीं हो पाया. उन्होंने बताया कि 38 दिन के भीतर संसद 24 दिन चली जिसमें विनियोग विधेयक और 2011-12 के लिए अनुपूरक मांगे पारित की गयी एवं लोकसभा में महंगाई तथा गंगा एवं हिमालय के दोहन पर नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा हुई जबकि राज्यसभा में महंगाई एवं किसानों की आत्महत्या पर नियम 176 के तहत अल्पकालिक चर्चा हुई एवं सफाई कर्मचारियों एवं मस्तिष्क ज्वर आदि पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए गए. उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी विदेशी बैंक में जमा काले धन पर स्थगन प्रस्ताव भी लाये जिस पर छह घंटे तक बहस चली. उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 तथा इलेक्ट्रानिक डिलीवरी आफ सर्विसेज 2011 सिटीजन चार्टर तथा कंपनी विधेयक लोकसभा में पेश किए गए. उन्होंने बताया कि लोकसभा में पेश 27 विधेयकों में से 18 विधेयक पारित हुए. उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान विधेयक 2011 राज्यसभा में पेश किया गया. उन्होंने यह भी बताया कि राज्यसभा में 18 विधेयक पारित किए. इनमें अकादमी आफ साइंटिफिक एण्ड इनोवेटिव रिसर्च विधेयक 2011 विधेयक भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि लोकसभा में कंपनी विधेयक 2009 को वापस ले लिया गया और कंपनी विधेयक 2011 पेश किया गया तथा लोकपाल 2011 वापस लेकर लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक 2011 पेश किया गया जो लोकसभा से पारित हुआ.

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