रुपये की गिरावट, आरबीआई ने खड़े किए हाथ

मुंबई, 18 नवंबर. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऐलान कर दिया कि वह रुपये में गिरावट को रोकने में असमर्थ है। उसने संकेत दिए कि यह गिरते हुए चाकू को पकडऩे जैसा होगा और इसमें काफी खतरा है।

जानकारों का कहना है कि रुपया कमजोरी का नया रेकॉर्ड बना सकता है। जो लोग रुपए की गिरावट थामने के लिए केंद्रीय बैंक से विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल की गुहार लगा रहे हैं, उन्हें आरबीआई के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने याद दिलाया कि भारतीय मुद्रा फ्लोटिंग करंसी है।

उन्होंने कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम करने के लिए हेजिंग का रास्ता खुला है। गोकर्ण ने कहा, इस तथ्य को न भूलें कि वैश्विक हलचल का भी यहां असर हो रहा है। जिस काम को करने की हमारे पास पूरी क्षमता नहीं है, उसकी कोशिश या वैसा करने से क्षमता खत्म हो सकती है। यह जोखिम भरी रणनीति हो सकती है। गोकर्ण विदेशी मुद्रा भंडार का जिक्र कर रहे थे।

सरकार द्वारा रुपये को सहारा देने के लिए सरकारी प्रयासों का असर दिखना शुरू होगा तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पेट्रोल पर सिर्फ 2 दिन पहले ही मिली राहत के जल्द ही खत्म होने के आसार दिखने लगे हैं। बुधवार से तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में करीब 1.85 रुपये प्रति लीटर की कमी की। 15 दिन बाद इसकी दोबारा समीक्षा होनी है। शुक्रवार को रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले इतनी बढ़ गई कि यह राहत जारी रहने की उम्मीद कम हो गई।

अगर सरकार इसकी कीमत नहीं बढ़ाएगी तो उसे तेल कंपनियों के घाटे को पूरा करना होगा। 31 मार्च, 2009 के बाद पहली बार रुपये ने 51 डॉलर का आंकड़ा पार किया।

डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर होने का मतलब कच्चे तेल के लिए कंपनियों को ज्यादा रकम चुकाना है। जाहिर है, ऐसे में कंपनियां इंटरनैशनल मार्केट में तेल की कीमत घटने के बावजूद यहां पेट्रोल की कीमत घटाना नहीं चाहेंगी।

हालांकि, शुक्रवार को इंटरनैशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आई। नाइमेक्स में कच्चा तेल 99 डॉलर से भी नीचे चला गया। यूरोपीय कर्ज संकट का उस पर भी असर पड़ा है, लेकिन जिस तरह डॉलर कीमत बढ़ी है, उसे देखकर किसी तरह के राहत की संभावना नहीं है।

Related Posts: