बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून बना दिया. इन्हीं के लिये बाल श्रम उन्मूलन कानून भी बना हुआ है. सर्व शिक्षा अभियान और आंगनबाड़ी मुहीम भी चल रही है. पर प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में शिक्षकों का भारी अभाव है. जहां शिक्षक पदस्थ हैं वे स्कूल जाते नहीं हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों में बच्चे तो जाते हैं पर शिक्षक नहीं आते.

अभी भी बाल श्रमिक हर जगह दिखाई दे रहे हैं. शिक्षा का हल्ला तो खूब मच रहा है पर शिक्षा प्राप्त नहीं हो रही है. लम्बे समय से शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे स्कूलों के बारे में अब जाकर यह फैसला हुआ है कि जल्द ही स्कूलों के लिए संविदा शिक्षकों की भर्ती शुरु की जायेगी. आगामी माह 10 अक्टूबर से हाल ही में व्यापम की परीक्षा से चुने गए शिक्षकों को स्कूलों में पदस्थ करने का सिलसिला शुरू हो जायेगा.

शिक्षा सत्र जून से शुरू हो चुका है. लेकिन शिक्षकों की भर्ती व नियुक्ति में इतनी देर सरकार व प्रशासन की घोर लापरवाही और अक्षमता है. समय रहते व्यवस्था न कर पाना उनकी योग्यता को अयोग्यता साबित करता है.  बच्चों के पांच महीने का समय व्यर्थ चला गया बाकी समयकाल में पढ़ाई व कोर्स कैसे पूरा होगा. सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षक वर्ग-3 के लिए लगभग 50 हजार शिक्षक भर्ती किए जा रहे हैं. अब स्कूल प्रशासकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बाकी बचे समय में पढ़ाई नियमित रूप से चले और शिक्षक स्कूल पहुंचें.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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