मध्यप्रदेश में अपराधों में न सिर्फ बेतहाशा वृद्धि हुई है बल्कि संगीन अपराध भी बहुत तेजी से बढ़ गये हैं. यह कहा जा सकता है कि अपराध चौगुनी गति से बढ़ चुके हैं. राजधानी में व महानगरों में लोगों को दिनदहाड़े लूटा जा रहा है, गोली मार दी जाती है. लोगों को फिरौती के लिये अगवा किया जा रहा है. राज्य में अपराध न सिर्फ बढ़े हैं बल्कि पूरा राज्य ही असुरक्षित व संत्रस्त अवस्था में पहुंच चुका है.

अब खूंखार व सम्पन्न अपराधियों को जेल का भय नहीं रहा है. वे वहां रिश्वत देकर सभी सुविधाएं पा जाते हैं. जेल से ही अपने अपराध जगत का संचालन करते हैं. अदालतों में इनके खिलाफ गवाह नहीं आते. समाज कायरता की हद तक पहुंच गया है. सड़क पर अपराध देखते रहते हैं- उसकी मदद को आगे नहीं आते. दिल्ली में जैसिकालाल को धनाढ्य वर्ग के भीड़ भरे रेस्तरां में गोली मारी गई और एक भी गवाह आगे नहीं आया. यही स्थिति देश भर में है. ऐसे माहौल में यदि पुलिस थानों व पुलिस बल को बढ़ा भी दिया जाए तो स्थिति में कोई परिवर्तन आ जायेगा, ऐसा प्रतीत नहीं होता है.

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 87 हजार पुलिस बल है. इसमें जिला पुलिस व सश पुलिस बल (एस.ए.एफ.) भी शामिल है. मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन लगातार यह महसूस कर रहा है कि राज्य में आबादी के हिसाब से पुलिस बल बहुत ही कम है इसलिये 89 हजार दुगने से भी दो हजार ज्यादा अतिरिक्त पुलिस बल की मांग शासन को भेजी है. यही संकेत भी मिले हैं कि राज्य में पुलिस बल दुगना एक लाख 76 हजार हो जायेगा. लेकिन पुलिस को आबादी के हिसाब से न नापा जाए बल्कि अपराध और अपराधियों के पास मौजूद हथियार व साधनों का भी आंकलन कर उससे ज्यादा हथियार व साधन सम्पन्न भी बनाया जाए. पुलिस की क्षमता संख्या बल में नहीं बल्कि अपराध नियंत्रण में होना चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: