रेत की राजनीति

पिछले कुछ दशकों से सारे देश के साथ मध्यप्रदेश में भी आवास भवन निर्माण का काम असाधारण तेजी से चल रहा है. इस समय सबसे ज्यादा चलने और मुनाफे वाला धंधा भूखंड व आवासों के चल रहे हैं. बैंकों ने ”होम लोन” के लिए पिटारा खोल रखा है. ऐसे में भवन निर्माण सामग्री सीमेंट, लोहा, लकड़ी, गिट्टी, रेत व मुरम का धंधा और इनमें भ्रष्ट्राचार भी पूरे शबाब पर हो रहा है.

जैसे बड़े और छोटे नेता राशन व घासलेट की दुकानें हथिया लेते हैं. वैसा ही काम रेत, मुरम, गिट्टी की खदानों व खनन पर हो रहा है. रेत, मुरम, गिट्टी, बजरी का काम शहरों से दूर गांवों व जंगलों के निकट होता है इसलिए इनका नियंत्रण व निगरानी भी निगाह में आ नहीं पाती है. अवैध व दबंगई से रेत, मुरम,गिट्टी ट्रकों की कतार से बिना रायल्टी दिये उठाई जा रही है. सरकार को करोड़ों का चूना लग रहा है. हाल ही भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष श्री प्रभात झा ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को हिदायत दी थी कि वे मकान, दुकान व खदान से दूर रहें. इसके लिए पार्टी में न आएं. शहरी अतिक्रमण तो निगाह में आ जाता है लेकिन खदानों का अतिक्रमण बहुत बड़े पैमाने पर चल रहा है. हर नदी नाले के किनारे में रेत मुरम मुफ्त की कमाई के लिए उठाई जा रही है.

राज्य के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान व नेता प्रतिपक्ष के बीच इस समय अवैध खदानों व खनन के आरोपों की राजनीति चल रही है. श्री अजय सिंह का आरोप है कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र बुधनी में अवैध उत्खनन कर्नाटक के रेड्डी बंधुओं के बैल्लारी के लोह अयस्क के अवैध उत्खनन से भी ज्यादा है. उन्होंने कहा है कि 200 करोड़ का अवैध उत्खनन हो रहा है. वहीं मुख्यमंत्री ने कहा है कि अवैध उत्खनन से सख्ती से निपटा जायेगा. यह दावा भी किया है कि खनिज विभाग त्रेमास में 628 करोड़ रुपयों का लक्ष्य से 157 प्रतिशत अधिक 977 करोड़ रुपयों की आमदनी की है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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