नई दिल्ली, 22 जुलाई. यूपीए के संकटमोचक, राजनीति के चाणक्य, बेहतरीन प्रशासक, पूर्व वित्त, विदेश और रक्षा मंत्री. सतापक्ष ही नहीं विपक्षी खेमें में भी उतने ही सम्मानित हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता- प्रणब मुखर्जी. 4 फीट 8 इंच के दादा किसी परिचय के मोहताज नहीं लेकिन 77 साल पहले 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के मिराटी गांव में जब पोलटू नाम के बच्चे ने जन्म लिया तो किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि वो एक दिन देश का राष्ट्रपति बनेगा.

वकालात और पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले प्रणब 1969 में पहली बार राज्य सभा में चुनकर आए, तब से उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. 1973 में पहली बार प्रणब मुखर्जी केंद्रीय मंत्री बने. इसके बाद से उन्होंने कांग्रेस या उसकी अगुवाई वाली लगभग सभी सरकारों में मंत्री पद संभाला. 1980 में वाणिज्य मंत्री, 1982 में वित्त मंत्री, 1995 में विदेश मंत्री और 2004 में प्रणब ने पहली बार रक्षा मंत्री का पदभार संभाला. साल 2009 से 26 जून 2012 तक प्रणब वित्त मंत्री रहे. 1996 से 2004 तक केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार रही लेकिन 2004 में यूपीए के सत्ता में आने के बाद से ही प्रणब मुखर्जी सरकार और कांग्रेस पार्टी के संकटमोचन की बड़ी भूमिका में नजर आए.

वो पहली बार 2004 में ही लोकसभा चुनाव जीते. कांग्रेस में भी प्रणब की भूमिका काफी अहम रही लेकिन इंदिरा गांधी की मौत के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब प्रणब को पार्टी छोडऩी पड़ी. इंदिरा की हत्या के बाद पीएम बने राजीव गांधी ने प्रणब को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया. इससे नाराज होकर प्रणब ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया. नरसिम्हा राव प्रणब को वापस कांग्रेसी मुख्यधारा में लेकर आए और योजना आयोग का उपाध्यक्ष बना दिया. मनमोहन सरकार में तो प्रणब मुखर्जी का कद इतना बड़ा हो गया कि सरकार के हर संकट का हल दादा ही निकालने लगे. हालांकि कई बार वो खुद विवादों में भी घिरते रहे.

आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के कई फैसले के लिए लोग प्रणब को जिम्मेदार ठहराते हैं. उन्हें शाह कमीशन के सामने भी पेश होना पड़ा. पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया लेकिन इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटने के बाद प्रणब मुखर्जी के खिलाफ लगे आरोप वापस ले लिए गए. बॉम्बे डाइंग के खिलाफ रिलायंस इंडस्ट्रीज को मदद पहुंचाने का भी उनपर आरोप लगा. बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को भारत से बाहर करने के मामले में भी उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी. गृहमंत्री पी चिदंबरम के साथ खींचतान किसी से छिपी नहीं. सोनिया के दखल के बाद ही प्रणब शांत हुए. आरोपों का डटकर मुकाबला करने में प्रणब की जबरदस्त क्षमता है. वो झुकना नहीं जानते और यही वजह है कि दादा के लिए रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं.

1952-2012 तक कौन-कौन बना देश का राष्र्ट्रपति

देश में अब तक हुए राष्र्ट्रपति और उनका कार्यकाल इस प्रकार है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद- 13 मई 1952 से 12 मई 1962, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन- 13 मई 1962 से 12 मई 1967, डॉ. जाकिर हुसैन- 13 मई 1967 से 3 मई 1969, वराहगिरि वेंकट गिरि- 3 मई 1969 से 20 जुलाई और 24 अगस्त 1969 से 23 अगस्त 1974, डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद- 24 अगस्त 1974 से 11 फरवरी 1977, नीलम संजीव रेड्डी- 25 जुलाई 1977 से 24 जुलाई 1982, ज्ञानी जैल सिंह- 25 जुलाई 1982 से 24 जुलाई 1987, आर वेंकटरमन- 25 जुलाई 1987 से 24 जुलाई 1992, डॉ. शंकर दयाल शर्मा- 25 जुलाई 1992 से 24 जुलाई 1997, के आर नारायणन- 25 जुलाई 1997 से 24 जुलाई 2002, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम- 25 जुलाई 2002 से 24 जुलाई 2007, प्रतिभा पाटिल- 25 जुलाई 2007 से 24 जुलाई 2012. अब तक सिर्फ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ही दो बार राष्ट्रपति चुने गए. डॉ. जाकिर हुसैन के निधन पर वी वी गिरि उपराष्ट्रपति होने के नाते पहले कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे. बाद में वह विधिवत राष्ट्रपति चुने गए.

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