भोपाल,31 जुलाई,नभासं. प्रदेश कांग्रेस प्रचक्ता अभय दुबे ने आज कहा कि म.प्र. के सभी तालाब संक्रमण काल के दौर से गुजर रहे हैं. उन्होंने सरकार से तालाबों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है.

उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि आज यदि राजधानी के तालाबों के कैंचमेंट पर जिम्मेदार संस्थाएं अतिक्रमण को प्रोत्साहित कर रही है तो पूरे प्रदेश के क्या हाल होंगे. उन्होंने कहा कि आज समूचे म.प्र. के 50 जिलों में लगभग 269 बड़े तालाब या झील हैं, जिसमें से शहर जैसे भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, छतरपुर, टीकमगढ़, शहडोल, कटनी, दमोह, पन्ना और रीवा ऐसे शहर हैं, जिनके आसपास 10-10 से अधिक झीलें हैं और शेष 40 जिलों में 10 से कम झीलें मौजूद हैं. परिस्थितियां यह हैं कि हरदा, राजगढ़, मुरैना और बुरहानपुर जैसे शहर में पुरातन समय की झीलें समाप्त हो चुकी हैं.

कुछ तालाब जैसे बहादुर सागर-झाबुआ, यशवंत सागर और बिलावली तालाब-इंदौर, सीतापथ लेक-धार, जाजू सागर-नीमच, गोविंदगण लेक-रीवां,  लोकपाल सागर, निरपत सागर-पन्ना, नागचून लेक-खंडवा, चंद्रपठा लेक-शिवपुरी, अमही लेक-अशोकनगर, उंडासा लेक और गंभीर-उज्जेन, उमरार-उमरिया, राजघाट, सुरखी लेक-सागर, राजनगर लेक-दमोह, कनारागोंद-छिंदवाड़ा, जामुनिया लेक-सीहोर, अपरलेक-भोपाल. ये ऐसे तालाब हैं जो आज भी इन शहरों के लोगों की पीने के पानी की प्रतिपूर्ति कर रहे हैं. म.प्र. में कुल 150 लेक ऐसे हैं जो 1 से 5 स्क्वयर किलोमीटर के दायरे में है. 22 झील ऐंसी हैं जो 5 से 20 स्क्वयर किलोमीटर में फैले हुए हैं और 7 तालाब ऐसे हैं जो कि 20 स्क्वयर किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्रफल में फैले हुए हैं.

म.प्र. में गांवों में लगभग 2598 बड़े तालाब मौजूद हैं. कहने का आशय यह है कि इतनी बड़ी और इतनी संख्या में जल आकृतियां होने के बाद भी इनके दृष्टिगत कोई कानून हमारे पास नहीं है. हमारे पास इन जल आकृतियां में से अधिकांश जल आकृतियों की कोई इकोलॉजिकल स्टर्डी मौजूद नहीं है, न ही इनके कैंचमेंट एरिया के संरक्षण को लेकर कोई कानूनी प्रावधान है. जहां तक शहरी क्षेत्र का विषय है तो उन क्षेत्रों के भूमि उपयोग को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग उनका भूमि उपयोग निर्धारित कर उन्हें प्रोटेक्ट कर सकता है, किंतु अधिसंख्य जल संरचनाएं और उनका कैंचमेंट निवेश क्षेत्र के बाहर आता है. अर्थात उनके नियंत्रण का कोई कानून हमारे पास मौजूद नहीं है.

बेहतर होता कि हम वर्ष 1971 में यूनाईटेड नेशन द्वारा आयोजित किये गये ईरान में रामसार कन्वेंशन ऑन वेटलेंट्स के माध्यम से निर्देशित 11 बिंदुओं जिसमें वेटलेंट्स के कर्जवेशन को लेकर बात कहीं गई थी, उसके आधार पर कानून बनाते. म.प्र. कांग्रेस कमेटी कैंचमेंट एरिया प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराने की हर संभव कोशिश म.प्र. में करेगी. 8-10 दिवस के भीतर इस एक्ट का एक ड्राफ्ट तैयार कर कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के नेतृत्व में मुख्य सचिव को सौंपेगी. इतना ही नहीं यदि सरकार इस पर कोई पहल नहीं करती तो अगले सत्र में प्रायवेट मेंमबर बिल के तौर पर सदन में कांग्रेस विधायकों के माध्यम से इस कानून को रखा जाएगा. म.प्र. कांग्रेस कमेटी प्रत्येक जिले में अपने पदाधिकारियों को उनके जिले की झीलों और तालाब की विस्तृत जानकारी मुहैया करायेगी, जिसमें उस तालाब का क्षेत्रफ ल, उसके कैंचमेंट एरिया का क्षेत्रफ ल और उसकी उत्पत्ती के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही पदाधिकारियों से आग्रह किया जाएगा कि अपने क्षेत्र के वॉटर बाडीज् के संरक्षण के लिए आम जनता के साथ पूरी तरह काम प्रारंभ करे.

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