पत्थर के आड़ में कोयले की हो रही बिक्री, अधिकारी मौन

उमरिया 18 अक्टूबर.  संजय गांधी ताप विद्युत केन्द्र मंगठार में बिजली उत्पादन के लिये कोयला आता है पर कोयला बिजली उत्पादन के लिये कम बल्कि कोयले को पत्थर के आड़ में फेंक कर उस कोयले को ट्रेक्टरों में लोड कर गेट नं. 2 के आगे जंगल में इकठ्ठा किया जाता है, और फिर उसे ट्रकों में लोड कर कटनी या शहडोल की ओर ले जाया जाकर चोरी का कोयला बिक्री करना बताया जाता है.

इस तरह का खेल संजय गांधी ताप विद्युत केन्द्र में कार्यरत ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है. माल गाड़ी से कोयला संजय गांधी ताप विद्युत केन्द्र मंगठार आता है और उसे स्थानीय ठेकेदार द्वारा ट्रेन के डिब्बों से खाली कराना एवं प्लांट के अंदर तक कोयला पहुंचाना और कोयले की छटाई का काम ठेकेदार द्वारा लिया गया है, पर पत्थर के नाम से कोयला फेंका जाता है और कोयले की अवैध बिक्री की जा रही है सूत्रों ने बताया कि माल गाड़ी से कोयला उतारना और उसे प्लांट के अंदर तक पहुंचाना एवं कोयले की छटाई करने का काम के.पी. मिश्रा ठेकेदार का ठेका होना बताया जाता है। पत्थर की आड़ में कोयले को बाहर कर ट्रेक्टरों से गेट नं. 2 के आगे जंगल में एकत्रित किया जाता है जिसे ट्रकों में लोड़ कर बाहर बेचना बताया जाता है इस तरह के अवैध करोबार ठेकेदारों द्वारा प्लांट को क्षति पहुंचाने के लिये किये जा रहे है संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि एसे ठेकेदारों का ठेका निरस्त कर कार्यवाही की जानी चाहिए। पर सब अपने निजी स्वार्थ में ही लिप्त रहते है।

ठेकेदार के श्रमिक की करंट लगने से हुई मौत – कुछ दिन पहले के.पी. मिश्रा  ठेकेदार के एक कर्मचारी का ट्रेन से कोयला उतारते समय बैंकर तार से हाथ लग गया था और बहुत ज्यादा करेन्ट से श्रमिक झुलस गया था जिन्दगी और मौत से वह कर्मचारी खेलता रहा पर अंतत: लगभग 20 दिन पूर्व जबलपुर महाकौशल अस्पताल में उसकी मौत हो गई। श्रमिक के पास अगर ईलाज के लिये पर्याप्त धन होता तो आज उसकी मौत न होती लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और हठधर्मिता के कारण श्रमिक को अपनी जान गवानी पड़ी. कोयले के अवैध व्यवसाय में स्थानीय ठेकेदार कई दिनों से लिप्त है प्लांट के संबंधित अधिकारी अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करते है और प्लांट के कोयले की अवैध बिक्री में सहभागी बताये जाते है. इस संबंध में संजय गांधी ताप विद्युत केन्द्र के संबंधित अधिकारी से जानकारी के लिये बार-बार मोबाईल फोन किया गया पर घंटी जाने के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव नही किये. जिससे प्लांट के अधिकारी से चर्चा नहीं हो सकी.

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