नई दिल्ली, 22 नवंबर. लोकपाल के दायरे में कौन रहेगा और कौन नहीं, इसे लेकर जारी अटकलों के बीच संसद की एक स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक सिंघवी ने मंगलवार को कहा कि यह प्रस्तावित विधेयक कामकाज की दृष्टि से व्यावहारिक होगा।

लोकपाल विधेयक पर गौर कर रही संसद की कार्मिक तथा विधि और न्याय मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष सिंघवी ने बताया कि समिति का हर एक सदस्य मजबूत और संवैधानिक रूप से मान्य विधेयक सुनिश्चित कराने के लिये श्रेष्ठ कोशिशें करेगा। इसका मकसद कामकाज की दृष्टि से एक व्यावहारिक विधेयक को आकार देना है। उनकी यह टिप्पणी इस लिहाज से महत्व रखती है कि कुछ खबरों में कहा गया है कि प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री पद को लाने को लेकर संसदीय समिति के सदस्यों में तीखे मतभेद हैं। कुछ सदस्यों का यह मानना है कि प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में होना चाहिए और अन्य सदस्यों ने कहा है कि ऐसा करने से बचना चाहिए। कुछ सदस्यों ने मध्य मार्ग सुझाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री को इस दायरे में लाया जाना चाहिए. लेकिन इसमें विदेशी मामलों तथा आंतरिक सुरक्षा से संबंधित उनके कुछ कर्तव्यों को दायरे से बाहर रखने जैसी कुछ शर्तें होनी चाहिए। सिंघवी ने कहा, बड़ी संख्या में मुश्किल और जटिल मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि समिति सात दिसंबर को उसका कार्यकाल खत्म होने से काफी पहले अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। सिंघवी ने कहा कि समिति की इस सप्ताह दो या तीन बैठकें होंगी और फिर रिपोर्ट को वितरित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, कोई समय सीमा नहीं दी जा सकती लेकिन हम संतोषजनक तरीके से प्रगति कर रहे हैं।

अन्ना टीम सुषमा और जेटली से मिली

भ्रष्टाचार से निपटने के लिये जनलोकपाल कानून शीघ्र बनाये जाने की मांग को लेकर अन्ना टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण और मनीष सिसोदिया ने श्रीमती स्वराज और श्री जेटली से संसद भवन में मुलाकात की. अन्ना टीम ने भाजपा से संसद के शीतकालीन सत्र में ही जन लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिये सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया.

भाजपा नेताओं ने अन्ना टीम को आश्वासन दिया कि वे मजबूत लोकपाल के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि संसद के मौजूदा सत्र में इस बारे में विधेयक लाया जाये तथा इसके दायरे में प्रधानमंत्री भी हों. उसका मानना है कि प्रभावी लोकपाल होने से भ्रष्टाचार से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा. उल्लेखनीय है कि संसद के वर्षाकालीन सत्र के दौरान जानेमाने समाजसेवी अन्ना हजारे ने राजधानी में अनशन किया था जिसे भारी जनसमर्थन मिला था और उनके दबाव के चलते लोकसभा में मजबूत लोकपाल के पक्ष में एक प्र्रस्ताव पारित किया गया. इसके बाद श्री हजारे ने यह कहते हुये अपना अनशन तोड़ा था कि अगर सरकार ने शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पारित नहीं किया तो वह फिर अनशन करेंगे.

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