दिल्ली गैंगरेप केस में नहीं थमा बवाल, पीडि़ता की हालत चिंताजनक

Pranab Mukherjeeनई दिल्ली, 25 दिसंबर. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना पर ‘गहरा शोक’ व्यक्त किया. उन्होंने चेतावनी दी कि इस ‘वीभत्स घटना’ पर गुस्सा जायज़ है पर यह समाधान नहीं है.

हिंसक प्रदर्शन में घायल हुये दिल्ली पुलिस के हवलदार की मौत पर शोक जताते हुये राष्ट्रपति ने युवाओं से ‘भावनाओं पर नियंत्रण’ रखने की अपील की. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार द्वारा जरूर कार्रवाई की जा रही है. मुखर्जी ने कहा, ”मैं इस मौके पर हाल ही में दिल्ली में एक लड़की के साथ हुयी बर्बर हिंसा पर गहरा दुख जाहिर करता हूं. मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा, ”मैं इस वीभत्स घटना पर गुस्से को जायज ठहराता हूं.

लेकिन मैं युवाओं को यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि हिंसा ही समाधान नहीं है.” उन्होंने कहा, ”मुझे बताया गया कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान घायल हुये सुरक्षाकर्मी की मौत हो गयी है. अपना कर्तव्य निभाते वक्त प्राण देने वाले युवा व्यक्ति की मौत पर मैं शोक व्यक्त करता हूं.” मुखर्जी ने युवाओं से अपील की कि वह अपनी भावनाओं पर काबू रखें और उम्मीद जतायी कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी. बलात्कार की पीडि़ता को ‘बहादुर युवा लड़कीÓ बताते हुये राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने उसकी सेहत में ‘जल्द सुधार’ के लिये प्रार्थना की. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार जरूरी कदम उठा रही है जिससे सुनिश्चित हो सके कि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों.

कॉन्स्टेबल की मौत
घायल दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल सुभाष सिंह तोमर की मौत के बाद पुलिस ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के एक सदस्य सहित आठ लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. इन आठ लोगों के खिलाफ सोमवार को हत्या के प्रयास, दंगा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया था. तोमर (47) की मौत के बाद पुलिस ने आठों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का निर्णय लिया.

क्रिसमस पर भी प्रदर्शन
इधर कड़ाके की ठंड और सुरक्षा कड़ी होने के बावजूद जंतर-मंतर पर कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया। क्रिसमस की छुट्टी पर लोग सुबह ही अपने घरों से निकल पड़े और जंतर-मंतर पर पहुंचकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे तब तक यहां रोज आते रहेंगे जब तक सरकार महिलाओं के खिलाफ कठोर कानूनी प्रावधान लागू नहीं करती। इधर लगातार तीसरे दिन मध्य दिल्ली के नौ मेट्रो स्टेशन बंद रहे।  राजीव चौक, बाराखंबा रोड, मंडी हाउस, प्रगति मैदान, पटेल चौक, उद्योग भवन, केंद्रीय सचिवालय, रेसकोर्स रोड और खान मर्किट स्टेशनों के गेटों पर ताला लटका रहा।

पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में शंकर बिष्ट, नंद, शांतनु, कैलाश जोशी, अमित जोशी, अभिषेक, नफीस अहमद और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता चमन का नाम शामिल हैं. आठों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 302 (हत्या), 186 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), 353 (सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकने के लिए आपराधिक ताकत का उपयोग करना) आदि के मामले दर्ज किए गए हैं.

इन सभी को कल गिरफ्तार किया गया था, बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस बीच आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि पुलिस इंडिया गेट पर पथराव में शामिल वास्तविक लोगों को पकडऩे में नाकाम रही है. पार्टी का दावा है, ‘लाठी चार्ज, पानी की बौछारों और आंसू गैस के गोले दागने की अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पुलिस ने निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच से गिरफ्तार किया है.Ó करावल नगर में नियुक्त तोमर को राजधानी में 16 दिसंबर की रात चलती बस में गैंगरेप की शिकार हुई 23 वर्षीय पैरा-मेडिकल छात्रा के समर्थन में रविवार को इंडिया गेट पर हो रहे प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने के लिए बुलाया गया था.

दिल्ली सरकार व पुलिस में ठनी

मामले में पीडि़ता के बयान को लेकर पुलिस व दिल्ली सरकार के बीच ठन गई है. जहां एक ओर बयान लेने वाली एसडीएम ने पुलिस पर दबाव बनाने का अरोप लगाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व  गृहमंत्रालय को शिकायती पत्र भेजा है, वहीं दिल्ली पुलिस कमिश्रर ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा है कि पुलिस की ओर से किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया गया. हालांकि आज दोबारा पीडि़त लड़की का बयान जज की मौजूदगी में दर्ज करा लिया गया.

पीडि़त लड़की के बयान लेने गई एसडीएम ऊषा चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि बयान लेने से पहले पुलिस के लोगों ने एक प्रश्रावली देकर उसी के हिसाब से बयान दर्ज करने के लिए दबाव बनाया था. इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस की बात नहीं मानने पर उनके साथ बदसलूकी भी की गई है. साथ ही उन्होंने कहा है कि पीडि़ता के बयान की विडियाग्राफी करने से भी पुलिस ने रोका था. एसडीएम ने शिकायती पत्र भेजकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व गृहमंत्रालय को इसकी सूचना दी.श्रीमति दीक्षित ने भी पुलिस की ओर से की गई हस्तक्षेप पर गृहमंत्रालय को जानकारी दी है.

एसडीएम के आरोप के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्रर नीरज कुमार ने सफाई देते हुए कहा है  कि एसडीएम ऊषा चतुर्वेदी की ओर से लगाया एक आरोप निराधार हैं.पुलिस ने ही पीडि़त लड़की के बिगड़ते हालात को देखते हुए एसडीएम के माध्यम से बयान दर्ज कराने का आग्रह किया था. नीरज कुमार ने कहा कि जिस वक्त एसडीएम ने पीडि़त लड़की का बयान दर्ज किया उस समय आईसीयू के बाहर  पीडि़ता की मां मौजूद थी. जबकि अंदर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था.

महिला संगठनों ने रेप के लिए फांसी का विरोध किया
करीब 50 महिला संगठनों, मानवाधिकार समूहों और देश के 100 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा है कि रेप के मामले में मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है, यौन हिंसा के मामलों में मौत की सजा न नैतिक है और न ही असरदार। इससे किसी तरह का कोई हल भी नहीं निकलने वाला। ऐसे समय में जब दिल दहला देने वाले गैंग रेप के मामले में पूरा देश एकजुट होकर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई यहां तक कि मृत्युदंड की मांग कर रहा है, तब इन संगठनों की ओर से एकजुट होकर यह बयान जारी किया गया है। नामचीन संगठनों की ओर से कहा गया है कि जो लोग फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं, वह ऐसा इसलिए मांग रहे हैं क्योंकि वह समझते हैं कि रेप मौत से बदतर है।

पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री के साथ रेप को इज्जत से जोड़ कर देखा जाता है और यह सोचा जाता है कि रेप एक लड़की के साथ होने वाली सबसे बुरी चीज है। इस सोच में बदलाव की जरूरत है जो यह मानती है कि किसी तरह के सेक्शुअल असॉल्ट के बाद महिला पूरी तरह से बर्बाद, खत्म हो जाती है। पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, तमिलनाडु विमिन फिश वर्कर फोरम और जागोरी जैसे संगठनों ने मिलकर कहा है कि हम मानते हैं कि रेप पितृसत्तात्मक समाज का हथियार है, हिंसक वारदात है और इसका नैतिकता, चरित्र या व्यवहार से कोई लेना-देना नहीं है।

इसे पेश करने वाले पांच सदस्यीय समूह में शामिल वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है और अलग-अलग सेक्शुअल असॉल्ट को सही ढंग से पहचानने जरूरत है। ग्रोवर ने बीजेपी नेता सुषमा स्वराज को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने रेप पीडि़त को जिन्दा लाश कहा था। ग्रोवर ने कहा कि रेप पीडि़त हमें हिम्मत देती हैं, क्योंकि वे रेप के बाद अपनी लड़ाई लड़ रही होती हैं। उन्होंने रेप के मामलों को लेकर ‘नारीवादी न्याय व्यवस्था’ की मांग की।

साउथ दिल्ली के मॉल में फिर छेड़छाड़
दिल्ली में हुए गैंगरेप का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि महिलाओं के खिलाफ एक और हाई फ्रोफाइल छेड़छाड़ का मामला सामने आ गया है। साउथ दिल्ली स्थित एक मॉल में एक लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी एक विदेशी कंपनी में एरिया मैनेजर बताए जाते हैं।

रात में घर से बाहर न निकलें लड़कियां
हैदराबाद. दिल्ली में पिछले हफ्ते दुष्कर्म की शिकार हुई 23 वर्षीय फिजियोथरेपी की छात्रा पर दुख जताने के बजाय आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उसके रात में घर से निकलने पर सवाल उठा दिया। हालांकि थोड़ी देर बाद ही उन्हें आभास हुआ कि उनका बयान विवाद का कारण बन सकता है। इसलिए प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने सफाई पेश करने की कोशिश की। बोत्सा सत्यनारायण ने कहा कि महिलाओं को रात में निकलने से बचना चाहिए, ताकि उन्हें किसी भी तरह के दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।

राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष बोत्सा सत्यनारायण ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि क्या हम रात में सड़क पर इसलिए घूमते हैं, क्योंकि हमें आजादी आधी रात को मिली थी?  उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि वह लड़की [दुष्कर्म पीडि़ता] उस वक्त निजी बस में सवार न होती। बयान पर विवाद होने की आशंका के कारण थोड़ी देर बाद ही सत्यनारायण ने प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई पेश कर दी। उन्होंने कहा कि एक पिता होने के नाते मैंने सिर्फ अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। जो हुआ वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण था और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। उन्होंने महिलाओं की भावनाओं को चोट पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी और कहा कि सरकार को सभी की सुरक्षा करनी चाहिए।

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