लाभ के पद पर रहने का आरोप

नई दिल्ली, 2 जुलाई. राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का नॉमिनेशन क्या रद्द होगा? एनडीए समर्थित उम्मीदवार पी.ए. संगमा और जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रणव के नॉमिनेशन पर सवाल उठा दिए हैं।

संगमा का कहना है कि प्रणव लाभ के पद पर हैं, इसलिए प्रेजिडेंट पद के लिए उनका नॉमिनेशन रद्द कर दिया जाना चाहिए। संगमा ने राज्य सभा में शिकायत दर्ज कराई है। अब सभी की नजरें राज्य सभा महासचिव पर हैं। वह ही इस पर स्थिति साफ करेंगे। गौरतलब है कि प्रणव भारतीय सांख्यिकी संस्थान के चेयरमैन हैं। राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 जून थी। जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने भी प्रणव के नॉमिनेशन पर सवाल उठाया है। उन्होंने सवाल किया है, क्या प्रणव का नॉमिनेशन रद्द होगा? स्वामी ने ट्विटर पर लिखा है, नॉमिनेशन फॉम्र्स की जांच अचानक कल तक स्थगित कर दी गई है। यह भी असंवैधानिक है।

उन्होंने इशारों-इशारों में कहा है कि अब देखते हैं सोनिया गांधी क्या करती हैं? पहले ही दे चुके हैं इस्तीफा? इस बीच कांग्रेस की तरफ से संगमा के आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया गया है कि प्रणव मुखर्जी बतौर वित्त मंत्री भारतीय सांख्यिकी संस्थान के चेयरमैन थे। इसलिए वित्त मंत्री पद से हटने के बाद उनके इस पद पर बने रहने का सवाल ही नहीं है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान ने भी इन आरोपों को गलत बताया है। उसका दावा है कि प्रणव मुखर्जी बाकायदा संस्थान के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके हैं। संस्थान के मुताबिक मुखर्जी ने 20 जून को इस पद से इस्तीफा दिया था।

वोट खरीदने का आरोप
मगर प्रणव की उम्मीदवारी को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। नया आरोप उड़ीसा के मुख्यमंत्री और बीजेडी नेता नवीन पटनायक ने लगाया है। उनका कहना है कि प्रणव राष्ट्रपति पद पर चुने जाने के लिए वोट खरीद रहे हैं। उनका आरोप है कि बिहार, बंगाल और यूपी को ज्यादा पैसे देकर उनके लिए समर्थन खरीदने की कोशिश हो रही है। मगर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव बाबू का समर्थन सिर्फ इसलिए किया क्योंकि पार्टी के मतानुसार उनका राष्ट्रपति बनना राष्ट्रहित में है। इसका राज्य को मिलने वाले फंडों से कोई संबंध नहीं है।

नामांकन पत्रों की जांच की तिथि बढ़ी
भारतीय जनता पार्टी समर्थित राषट्रपति पद के उम्मीदवार पीए संगमा की पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का नामांकन रद्द करने की मांग के बाद राष्ट्रपति पद के नामांकन पत्रों की जांच सोमवार को एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है। सचिवालय के  नामांकन पत्रों की जांच की तारीख एक दिन के लिए बढ़ा दी गई है। निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच की तारीख दो जुलाई निर्धारित की थी मगर सूत्रों ने बताया कि अब इनकी जांच मंगलवार को की जाएगी।

लाभ के पद पर नहीं हैं प्रणब: सरकार
पीए संगमा के दावे और आपत्तियों को खारिज करते हुए सरकार ने सोमवार को कहा कि संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी ने नामांकन दाखिल करने से पहले भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था और वे लाभ के किसी पद पर नहीं हैं। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि उन्होंने (प्रणब) अपना नामांकन दाखिल करने के एक सप्ताह पहले, 20 जून को भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। संगमा खेमे ने राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचन अधिकारी से आज मांग की कि प्रणब मुखर्जी का नामांकन रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि वह लाभ के पद पर आसीन हैं। इस मांग के कुछ कुछ ही देर बाद बंसल का यह बयान आया है ।

बंसल इस चुनाव में प्रणब मुखर्जी के अधिकृत प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि संगमा खेमे की इस मांग के बाद वह और गृह मंत्री पी.चिदंबरम प्रणब मुखर्जी से मिले। मुखर्जी ने उन्हें बताया कि वह नामांकन दाखिल करने से काफी पहले इस्तीफा दे चुके हैं। बंसल ने कहा कि प्रणब मुखर्जी कल अपराहन तीन बजे तक निर्वाचन अधिकारी को अपना लिखित उत्तर देंगे। बंसल ने कहा कि संगमा का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और कानूनी रूप से नहीं टिकने वाला है।

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