भारत-आस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट आज से

मेलबर्न, 25 दिसंबर. करिश्माई कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की अगुवाई में नित नयी ऊंचाइयां हासिल कर रही भारतीय टीम सोमवार को जब यहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट में उतरेगी तो उसका लक्ष्य कंगारूओं की जमीन पर पहली बार टेस्ट शृंखला जीतने के अपने संकल्प की धमाकेदार शुरुआत करना होगा.

ऑस्ट्रेलियाई टीम इस समय बदलाव और संघर्ष के दौर से गुजर रही और न्यूजीलैंड के खिलाफ होबार्ट टेस्ट में मिली हार से उसका मनोबल बुरी तरह गिरा हुआ है. ऐसे में भारत के पास ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शृंखला जीतने के अपने 64 वर्ष के सपने को पूरा करने का सुनहरा मौका है. उम्मीद की जा रही है कि इस शृंखला में भारत के दिग्गज बल्लेबाजों और ऑस्ट्रेलिया के युवा गेंदबाजों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा. भारतीय बल्लेबाजी की त्रिमूर्ति अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वी.वी.एस. लक्ष्मण का यह आखिरी ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जा रहा है जिसे वे यादगार बनाना चाहते हैं. सचिन के बहुप्रतीक्षित महाशतक पर भी सभी की निगाहें रहेंगी. उम्मीद की जा सकती है कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ही सचिन इस उपलब्धि को हासिल करके चार मैचों की शृंखला में भारत को शानदार शुरुआत देने में सफल रहेंगे. सचिन के अलावा ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग और मध्यक्रम के धाकड़ बल्लेबाज माइकल हसी के लिए भी यह अपने आपको साबित करने का यह आखिरी मौका है. पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे इन दोनों बल्लेबाजों पर अच्छे प्रदर्शन के लिए भारी दबाव है. भारत को ठोस शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी वीरेन्द्र सेहवाग और गौतम गंभीर पर रहेगी. सेहवाग एकदिवसीय इतिहास की सबसे बड़ी पारी खेलकर आत्मविश्वास से लबरेज हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर सात टेस्ट में 59.50 के औसत से 833 रन बनाए हैं जबकि गंभीर का यह पहला ऑस्ट्रेलिया दौरा है. टेस्ट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले शीर्ष तीन बल्लेबाज इस टेस्ट में खेल रहे हैं जिनमें से दो भारतीय टीम में हैं. तीसरे नंबर पर भारतीय टीम की दीवार को टेस्ट इतिहास के दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले द्रविड़ के मजबूत कंधों पर टीम के लिए बड़ी पारी खेलने की जिम्मेदारी होगी. सचिन के पास महाशतक बनाने की दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने का इस वर्ष यह आखिरी मौका होगा.

लक्ष्मण ने हमेशा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और एक बार फिर भारतीय टीम को उनसे ऐसे की प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी. छठे नंबर पर युवा विराट कोहली को पहले टेस्ट में जगह मिलनी तय है जिसका उन्हें फायदा उठाना होगा. अन्यथा शानदार फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा अगली बार उनकी जगह लेने को तैयार हैं. धोनी की कप्तानी में भारत ने 34 में से 17 टेस्ट जीत हैं. इंग्लैंड दौरे पर 0-4 से मिली हार को छोड़ दिया जाए तो धोनी का रिकॉर्ड शानदार रहा है. धोनी ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शृंखला जीतकर साबित कर सकते हैं कि इंग्लैंड दौरा उनकी कप्तानी के लिए एक अपवाद था. ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी कागज पर इतनी सशक्त नजर नहीं आती कि भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को चुनौती दे सके. जेम्स पैटिनसन, पीटर सिडल. बेन हिल्फेनहास और नाथन लियोन के रूप में ऑस्ट्रेलिया के पास कोई ऐसा नाम नहीं है जो विपक्षी बल्लेबाजों में सिहरन पैदा कर सके. भारतीय टीम की असली परेशानी तेज गेंदबाजों की फिटनेस है. टीम प्रबंधन के मुताबिक दोनों तेज गेंदबाज जहीर खान और ईशांत शर्मा अपनी चोटों से उबर चुके हैं, लेकिन यह कह पाना मुश्किल है कि चोटों से उबर कर दोनों गेंदबाज शुरूआती टेस्ट के लिए कितने मैच फिट हैं. लंदन में इस वर्ष पहले टेस्ट में देखा गया था कि जहीर ने 13.3 ओवर गेंदबाजी करने के बाद चोट के कारण मैदान छोड़ दिया था जिससे भारतीय गेंदबाजी बुरी तरह प्रभावित हुई थी. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि धोनी को विकेटकीपिंग ग्लब्स छोड़कर गेंदबाजी के लिए उतरना पड़ा था.

भारत इस बार लॉर्ड्स की पुनरावृति नहीं चाहेगा. भारत को यह देखना होगा कि गेंदबाजी में वह जिन्हें भी उतारे वह पूरी तरह फिट हों और मैच के पांचो दिन गेंदबाजी कर सकें. धोनी ने संकेत दिया है कि सभी खिलाड़ी फिट हैं और चयन के लिए उपलब्ध हैं. कप्तान के इस बयान से लगता है कि अभी गेंदबाजों की फिटनेस को लेकर टीम प्रबंधन में काफी मंथन चल रहा है. भारत के साथ सारी समस्या तेज गेंदबाजों को लेकर है. भारत यदि तीन तेज गेंदबाजों और एक स्पिनर के साथ उतरता है तो उसे तेज गेंदबाजों में जहीर, ईशांत, उमेश यादव, अभिमन्यु मिथुन और विनय कुमार में से चयन करना होगा. जहीर और ईशांत को छोड़कर बाकी तीनों तेज गेंदबाज पूरी तरह फिट हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरते समय एक फिट गेंदबाजी आक्रमण की सबसे बड़ी जरूरत है. भारत के अभ्यास मैचों में जहीर और ईशांत की फिटनेस को परखा गया था लेकिन टीम प्रबंधन उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं उठा सकता क्योंकि चोट गंभीर होने की सूरत में उन्हें पूरी शृंखला से ही बाहर होना पड़ सकता है. जहां तक ऑस्ट्रेलिया का सवाल है तो होबार्ट टेस्ट में मिली हार के बाद टीम का मनोबल गिरा हुआ है और पोंटिंग तथा हसी के लिए खुद को साबित करने का यह आखिरी मौका है. टेस्ट इतिहास के सफलतम कप्तान और सर्वाधिक रन बनाने के मामले में सचिन और द्रविड़ के बाद तीसरे नंबर पर मौजूद पोंटिंग पिछले लगभग दो वर्षों से शतक नहीं बना पाए हैं. मिस्टर क्रिकेट हसी भी खराब फॉर्म के कारण आलोचकों के निशाने पर हैं. माइकल क्लार्क ने ऑस्ट्रेलिया का पूर्णकालिक कप्तान बनने के बाद से कोई टेस्ट शृंखला नहीं गंवायी हैं. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 1-0 से जीत दर्ज की थी जबकि दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ 1-1 से शृंखला ड्रॉ रही थी. क्लार्क की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया की युवा और अनुभवहीन टीम की भारत के खिलाफ कड़ी परीक्षा होगी. आईसीसी रैंकिंग में भारत जहां दूसरे नंबर पर है वहीं ऑस्ट्रेलिया को चौथा स्थान हासिल है. भारत ने इस मैदान पर कुल दस टेस्ट खेले हैं जिसमें से उसने दो जीते हैं, एक ड्रॉ खेला है और सात हारे हैं.

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