श्री पी.ए. संगमा ने आज 20 मई को घोषित कर दिया कि वे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगे. यदि उनके नाम पर राजनैतिक दलों में सहमति हो गई और नहीं भी हुई तब भी वे चुनाव लड़ेंगे. श्री संगमा शरद पवार गठित नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एन.सी.पी.) के नेता है. इस पार्टी का प्रभाव केवल महाराष्ट्र में श्री पवार की वजह से और उत्तर पूर्व के मेघालय राज्य में श्री संगमा की वजह से है. दोनों एक ही पार्टी में हैं, लेकिन दोनों का नेतृत्व एक-दूसरे से बिलकुल अलग है.

इस समय राज्यसभा में श्री शरद पवार की पुत्री श्रीमती सुले…. और लोकसभा में संगमा की पुत्री अगाथा संगमा सांसद हैं. एन.सी.पी. के कोटे से अगाथा संगमा केन्द्र से ग्रामीण विकास राज्यमंत्री हैं और श्रीमती सोनिया गांधी से निकट मानी जाती हैं. श्री संगमा का नाम ओड़ीसा राज्य के मुख्यमंत्री श्री बीजू पटनायक ने उनके बीजू जनता दल और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सुश्री जयललिता ने उनका नाम द्रमुक दल की ओर से आगे बढ़ाया है. लेकिन श्री संगमा की खुद केवल- एन.सी.पी. ने अभी तक उनके नाम का समर्थन नहीं किया है. श्री शरद पवार का कहना है कि एन.सी.पी. अभी यू.पी.ए. सरकार का घटक है इसलिये राष्ट्रपति के उम्मीदवार के बारे में यू.पी.ए. को समग्र रूप से देखना होगा. बीजू जनता दल और अन्ना द्रमुक दोनों यू.पी.ए. में नहीं हैं.

अभी तक का आभास यह है कि यू.पी.ए. का नेतृत्व करने वाली कांग्रेेस वर्तमान में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाना चाहती है. श्रीमती प्रतिभा पाटिल से पूर्व जब श्री ए.पी.जे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बनाये गये थे तब उनके सबसे प्रखर समर्थक समाजवादी पार्टी के श्री मुलायम सिंह यादव थे. उस समय वापमंथी मोर्चे का नेतृत्व कर रही माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का कथन था कि राष्टï्रपति राजनैतिक व्यक्ति होना चाहिए और श्री कलाम वैज्ञानिक है. इस बार भी प्रारंभ में श्री कलाम का नाम कुछ दलों ने आगे किया था कि उन्हें दूसरी बार भी राष्टï्रपति बनाया जाए. इसके समर्थन में श्री मुलायम सिंह भी थे. लेकिन उन्होंने रुख बदल लिया और यह कहने लगे कि राष्टï्रपति राजनैतिक व्यक्ति ही होना चाहिए. इससे ऐसा आभास होता है कि वे श्री प्रणव मुखर्जी के पक्ष में हो गये हैं. इस समय यू.पी.ए. सरकार को समाजवादी पार्टी का समर्थन प्राप्त है और इसकी कटु विरोधी मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी समर्थन दे रही है. कांग्रेस व समाजवादी पार्टी को इस समय यू.पी.ए. के माध्यम से एक दूसरे की जरूरत है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने श्री अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व में अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली है. इसे सुचारू रूप से चलाने के लिये आर्थिक व राजनैतिक दृष्टिï में यू.पी.ए. सरकार के सहयोग की आवश्यकता है.

कभी केंद्र व राज्यों में कांग्रेस का एकाधिकार हुआ करता था और वे जिसे भी चाहते राष्टï्रपति बना लेते थे. लेकिन अब साझा सरकारों और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकार होने से अब मतों का बहुमत आपसी जोड़-तोड़ से ही होगा. सांसद व विधायक दोनों ही राष्टï्रपति को चुनते है. इस समय सांसदों के 5,49,408 और विधायकों के भी इतने ही 5,49,408 वोट है. इसमें यू.पी.ए. दलों के कुल 4,60,191 और एन.डी.ए. के 3,04,785 वोट है.

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