बाजार में शक्कर के भाव बढ़े नहीं हैं बल्कि सरकार ने उसका निर्यात खोलकर और स्टाक सीमा खत्म कर सटोरियों व जमाखोरों को प्रोत्साहन देकर बढ़ा दिये हैं. अभी सिर्फ घोषणा हुई है- निर्यात शुरु होने में कुछ दिन लगेंगे, लेकिन यह घोषणा होते ही चीनी थोक में 200 रुपये क्विंटल और रिटेल में 2 रुपये किलो महंगी होगी. सरकार कई बार कई वस्तुओं में यह कर चुकी है. उसके लिये कई तरह के तर्क व बहाने दिये जाते हैं. यह कहा गया कि गेहूं, चावल, शक्कर, प्याज का ज्यादा उत्पादन हो गया है इसलिये निर्यात खोलना जरूरी है. कभी कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इन वस्तुओं के भाव ऊंचे हो गये हैं इस समय इनके निर्यात से चीनी मिल मालिकों व प्याज उत्पादकों को काफी मुनाफा हो जायेगा. अभी 10 लाख टन चीनी का निर्यात बताया गया है और इसी के साथ मिल मालिकों की यह मांग भी शुरु हो गई कि 30 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी जाए.

इन दिनों प्याज, चावल का निर्यात चल रहा है, मिल मालिकों की तरफ से यह कहा जा रहा है कि इससे मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो जायेगी और वे गन्ना किसानों को भुगतान कर सकेंगे. मिलों को फायदा पहुंचाने के लिये पूरे देश के शक्कर उपभोक्ताओं पर महंगाई लाद दी. अभी हाल ही लोकसभा में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने यह कहा कि यूरोप के देशों में ऋण संकट बढऩे से महंगाई में तेजी रहेगी. लेकिन भारत के शक्कर व्यापार व बाजार का तो यूरोप के इस संकट से कोई लेना-देना नहीं है. इसके भाव किसी और बहाने बढ़ा दिये गये. शक्कर का निर्यात खोलने के साथ-साथ केन्द्र सरकार ने शक्कर की स्टाक सीमा भी खत्म कर दी. इससे व्यापारियों ने निर्यात के कारण भाव बढऩे तक शक्कर की जमाखोरी कर दी और सट्टïव्यापार वाले भी सक्रिय हो गये. इससे एकदम से शक्कर के भावों में उछाल आ गया.

दो वर्ष पहले 2009 में चीनी रिटेल बाजार में 47 से 49 रुपये किलो तक पहुंच गई थी. उस समय सरकार ने अगस्त 2009 में चीनी पर आगामी 30 नवम्बर 2011 तक के लिये स्टाक लिमिट लगाई है, जो सात दिन बाद खत्म हो रही है. इस लिमिट को बढ़ाये जाने की भी संभावना नहीं है. चावल पर भी कुछ राज्यों को छोड़कर शेष सभी ने स्टाक लिमिट खत्म कर दी है. इस समय खाद्यान्न व शक्कर व प्याज का व्यापार सरकार ने व्यापारियों, जमाखोरों और सटोरियों के हवाले कर दिया है. इस समय शादी का सीजन आने वाला है. उस समय शक्कर की मांग में तेजी आयेगी. गत दशहरा, दिवाली के त्योहारों के वक्त भी इनकी मांग में तेजी थी. उस समय सरकार ने पांच लाख टन चीनी का निर्यात खोलकर शक्कर के भाव बढ़ा दिये और इस समय 10 लाख टन चीनी निर्यात होने जा रही है. आने वाले दिनों में शक्कर के भावों में भारी उछाल निश्चित ही लग रहा है.  शक्कर मिल मालिकों व सरकार की ओर से यह बेतुकी बात भी कही जा रही है कि भाव ज्यादा नहीं बढ़ेंगे जबकि हकीकत यह है कि घोषणा होते ही भाव बढ़ गये.

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