लोकपाल मसले पर अलख जगाने वाले अन्ना हजारे तो यह कहकर शिथिल हो गये हैं कि वे पहले स्वास्थ्य लाभ कर लें, फिर लोकपाल पर लंबी लड़ाई छेड़ेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह अभी भी इस मसले पर दृढ़ हैं. उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में कहा कि सशक्त लोकपाल विधेयक जल्दी ही कानून बनाया जायेगा. उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि यह संसद के गत सत्र में पारित नहीं हो सका. इसमें लोकपाल और लोकायुक्त दोनों की व्यवस्थायें की गई थीं. ऐसा आभास होता है कि संसद के आगामी बजट सत्र में, जो आगामी मार्च से प्रारंभ होने जा रहा है, इसे कानूनी रूप दे दिया जायेगा. इसमें अन्ना व विपक्ष के दलों द्वारा ऐसी खामियां तो बताई जायेंगी कि इसमें क्या कमजोरियां हैं, लेकिन एक बार इस कानून को मूर्तरूप दे दिया जायेगा तो उसके बाद अनुभवों व क्रियान्वयन को देखते हुये आगे कितने भी संशोधन हो सकते हैं.

विपक्ष की भारतीय जनता पार्टी, उसकी राज्य सरकारें और यू.पी.ए. समर्थक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लोकपाल विधेयक को समग्र रूप में रखकर उसमें राज्यों के लोकायुक्तों की भी व्यवस्था करने के विरुद्घ हैं. ये लोकायुक्त को राज्य सरकारों के कानून के तहत ही बने रहने देना चाहते हैं. यदि राज्यों के लोकायुक्त केंद्रीय लोकपाल संगठन के अंतर्गत काम करेंगे तो वे ज्यादा सक्षम होंगे. इस प्रश्न पर आगे भी टकराव बना रहेगा और विधेयक को पारित कराने की गति बाधित हो सकती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टïचार मिटाने की दिशा में हम काफी आगे बढ़े हैं, लेकिन अभी आगे और जाना है, जिससे प्रशासन पारदर्शी रहे. सार्वजनिक जीवन में गतिशील प्रशासन के लिए आधुनिक तकनीक का पूरा लाभ लेना चाहिए. इस मामले में सिटीजन चार्टर, सूचना का अधिकार, न्यायिक जवाबदेही विधेयक और व्हिशिल ब्लोअर विधेयक महत्वपूर्ण कदम हैं.

भ्रष्टाचार के क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय का 2जी स्पेक्ट्रम का फैसला भी बहुत बड़ा कदम है. इसमें नागरिकों के इस अधिकार को स्वीकार व स्थापित किया है कि भारत का कोई भी नागरिक भ्रष्टाचारी जन सेवकों के विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है. श्री सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे सजग व सतर्क व क्रियाशील नागरिक सिद्ध हो रहे हैं जो लगातार ऐसे मामलों को उठाते रहते हैं. कुछ ही दिन पूर्व उन्होंने टू जी स्पेक्ट्रम में सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से एक बड़े घोटाले का पटाक्षेप इस निर्णय से कर दिया कि सभी 122 लाइसेंस रद्द कर नीलामी से आवंटन का आदेश दिया गया है. कांग्रेस के महामंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुन: विवेचन (रिब्यूपिटीशन) लगाई जायेगी. वहीं केन्द्रीय गृहमंत्री श्री चिदम्बरम को सी.बी.आई. अदालत ने दोषमुक्त करार देते हुए श्री सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी. इस पर श्री स्वामी ने भी कहा है कि वे आगे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक जायेंगे. भ्रष्टाचार के विरुद्ध देश भर में मामला गर्मा गया है. राज्यों में बड़ी-बड़ी कार्यवाहियां हो रही हैं. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का मामला पकड़ा गया. मध्यप्रदेश में भी लोकायुक्त छापे पड़ रहे हैं. अदालतों में येदुरप्पा, मुलायम सिंह, जयललिता, मायावती पर मुकदमे चल रहे हैं.

 

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