कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती… लेकिन क्या ये बात स्त्रियों की शिक्षा पर भी लागू होती है…? जी हां, हर उम्र में शिक्षा प्राप्त कर जीवन को एक नई दिशा दी जा सकती है… जरूरत है तो बस थोड़ी-सी कोशिश और ढेर सारे आत्मविश्वास की…

कई बार ऐसा होता है कि पारिवारिक कारणों से या फिर शादी जल्द हो जाने से पढऩे या कुछ बनने का ख्वाब अधूरा ही रह जाता है। अधिकांश शादीशुदा स्त्रियां हालात से समझौता कर लेती हैं और अपने सपनों को भूल जाती हैं। पर क्या यूं हाथ पे हाथ धरे बैठे रहना या परिस्थितियों से समझौता कर लेना सही है? अपनी प्रतिभा को सिर्फ इसलिए दबा देना क्योंकि परिवार के लोग नहीं चाहते, क्या उचित है?

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि मात्र अपनी इच्छापूर्ति के लिए घर-परिवार की शांति भंग कर दी जाए या आप अपनी जिम्मेदारियों से विमुख हो जाएं। लेकिन हर समस्या का एक हल होता है, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। विपरीत परिस्थितियों से धैर्यपूर्वक सामंजस्य बैठाना व उनका हल निकालना ही वास्तविक नारी शक्ति है। शादी के बाद यदि आपका उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना है तो यह भी न भूलें कि अब आप शादीशुदा विद्यार्थी हैं और यदि आपके इस निर्णय में आपसी तालमेल नहीं होगा तो आपके इस निर्णय की जरूरतें, समय की पाबंदियां आपकी शादीशुदा जिंदगी में कलह का कारण बन सकती हैं।

रोज-रोज के झगड़ों को निबटाने में आपकी मानसिक शांति व ध्यान तो भंग होता ही, आप अपनी पढ़ाई भी पूरी तन्मयता से नहीं कर पाएंगी। अत: शादी के बाद पढ़ाई या कोई भी नया काम करने से पहले आपसी सहमति जरूर ले लें। इसमें आगे चलकर विचारों के न मिलने या आपसी अनबन जैसी बात से बचा जा सकता है। किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक करने के लिए सबसे पहले स्वयं को तैयार करना पड़ता है कि आप इस कार्य और इससे जुड़ी सभी चुनौतियों को सफलतापूर्वक अंजाम देंगी। अपने ऊपर विश्वास रखें और आत्मविश्वास के साथ स्वयं को यह महसूस कराएं कि आप में इतनी शारीरिक, मानसिक क्षमता है कि आप न केवल अपनी शिक्षा और करियर के साथ, बल्कि पति व परिवार के साथ भी पूरा न्याय करेंगी। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने से बड़ी से बड़ी समस्या भी आसानी से सुलझ जाती है।

कुछ उपयोगी बिंदु

<    अपनी प्राथमिकता को समझें और उसी अनुसार उसे समय व महत्व दें।

< अपने को सुपर वूमन न समझें, अपने ऊपर इतना बोझ न लें कि आपकी हिम्मत बीच में ही टूट जाए। अपने को परखें कि आपसे क्या काम नहीं हो रहा है और ऐसे कौन से काम हैं, जो आपके अलावा कोई भी नहीं कर सकता। बाकी के काम आप किसी और को सौंपें अन्यथा आपकी शांति व समय बिना कारण ही व्यर्थ होंगे।

<    अपने आसपास के लोगों, सहयोगियों से भी सौहार्दपूर्ण संबंध रखें व मदद मांगने में हिचकिचाएं नहीं। स्वयं भी दूसरों की मदद करने में पीछे न रहें।

< अपने पढ़ाई के नोट्स, प्रोजेक्ट्स आदि पहले से ही तैयार रखें और कोई भी प्रोजेक्ट या असाइनमेंट मिलने पर फौरन कार्य प्रारंभ कर दें।

<    घंटों किसी एक समस्या को लेकर ही न उलझी रहें। अगर कोई कार्य मुश्किल लग रहा है तो उसे छोड़ दें और कुछ अन्य कार्य प्रारंभ कर दें। समय का महत्व समझें। समय की प्लानिंग करके चलने से न केवल समय की बचत होती है बल्कि आप मानसिक परेशानी व तनाव से भी बचती हैं।

<    अपने लिए वास्तविक सीमाएं निर्धारित करने का प्रयास करें। अपनी पढ़ाई व जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बैठाएं।

Related Posts: