नई दिल्ली, 22 मार्च, नससे. खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर नियंत्रण के लिए दूध व इसके उत्पादों के साथ ही अंडे का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है. सरकार ने माना कि इनकी कमी ही महंगाई के लिए जिम्मेदार हैं.

खाद्य एवं कृषि व्यापार सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रो. के.वी. थॉमस ने कहा कि अब दूसरी श्वेत क्रांति लाने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि भारत ने वैश्विक दूध उत्पादन में नंबर एक का स्थान प्राप्त कर चौदह साल पहले इतिहास रचा था लेकिन दूध उत्पादन की गति पिछले एक दशक से धीमी हो गई है. दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर मात्र पांच फीसदी पर स्थिर है जिससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि भारत आने वाले वर्षों में दूध का आयातक बन सकता है.

उन्होंने कहा कि दूध, डेयरी उत्पाद और अंडे की कमी खाद्य मुद्रास्फीति के प्रमुख कारक हैं. इसलिए जरूरी है कि डेयरी उद्यम अब सहायक गतिविधि के बजाए व्यवसाय की मुख्यधारा की गतिविधि बने. थॉमस के मुताबिक सरकार ने भंडारण विकास और विनियमन अधिनियम लागू किया है. इसके तहत सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गोदाम पंजीकृत किए गए हैं. यह अधिनियम किसान को भंडारित वस्तुओं पर मोल भाव का अधिकार देता है जिससे किसानों को फसल की कटाई के बाद तत्काल बेचने के बजाए बाजार की अस्थिरता व कमजोर कीमतों से बचने के लिए उपज को सुरक्षित रखने का मौका मिलता है.

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