व्यापार प्रतिनिधि
इन्दौर. 10 अक्टूबर, मध्य प्रदेश के हरदा जिले के नेमावर में रहने वाले किसान संतोष वर्मा और बंटी प्रजापत के लिए यह खरीफ सीजन सबसे खराब रहा है। अच्छी बारिश के बाद भी इन दोनों किसानों की सोया फसल बर्बाद हो गई है। हरदा, होशंगाबाद, सीहोर, विदिशा और रायसेन जिले में इनकी तरह कई और किसान हैं जिनकी फसल खराब हो गई है और उन्हें काफी झटका लगा है।

सरकारी अधिकरी इस मुद्दे पर बातचीत से आनाकानी कर रहे हैं। बंटी का कहना है कि 10 एकड़ जमीन में बोई गई सोया की फसल बर्बाद हो गई है और हालत इतनी खराब है कि इसकी लागत भी नहीं निकल पाई है। यहां दिलचस्प यह है कि सोया की फसल का अनुमान जाहिर करने वाले एकमात्र एजेंसी सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने रिकॉर्ड उत्पादन के साथ-साथ बंपर पैदावार की भविष्यवाणी की है।

शुरुआत में बोई गई सोया की फसल की कटाई कुछ इलाकों में शुरू हो चुकी है जबकि सबसे ज्यादा पैदावार वाली किस्म जेएस 335 की कटाई अगले हफ्ते शुरू होगी। इस किस्म की बुआई काफी बड़े इलाके में होती है। फफूंद आदि की वजह से कई इलाकों में सोया की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने या तो खराब फसल की कटाई कर ली है या फिर इन जिलों की जमीन में इसे दफन कर दिया है.

होशंगाबाद में सोया फसल की तबाही इससे पहले नहीं देखी गई. जिले के विभिन्न ब्लॉक में सर्वेक्षण किए जाने के बाद पता चला है कि मोटे तौर पर 10 से 40 फीसदी फसलों का नुकसान हुआ है। सर्वेक्षण के नतीजे का इंतजार हैं. होशंगाबाद में इस साल 2,05,750 हेक्टेयर में सोया की बुआई हुई है, लेकिन मौसम में बार-बार बदलाव होने से सोया की फसल को नुकसान पहुंचा और ज्यादा बारिश के चलते नमी बनी रहने से यह बीमारियों की चपेट में आ गई और पौधे का विकास ठीक तरह से नहीं हो पाया.

हरदा जिले के कलेक्टर एस पी खांडे ने स्वीकार किया कि इस जिले में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. सर्वेक्षण चल रहा है और इसके नतीजे जल्द सामने आएंगे.

सोपा अध्यक्ष यक्ष राजेश अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि म.प्र. के हरदा, होशंगाबाद, विदिशा और रायसेन में अधिक बारिश से फसल खराब हुई है, लेकिन फिर भी सोया पैदावार पिछले साल से अधिक है.

सोपा का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सोया की फसल बेहतर रहने की संभावना है। सोपा ने इस साल राज्य में 61.666 लाख टन सोयाबीन के उत्पादन का अनुमान जाहिर किया है। अगर ऐसा हुआ तो यह रिकॉर्ड होगा क्योंकि इस साल रकबा 55 लाख हेक्टेयर से बढ़कर महज 57 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है. सोपा के अनुमान के मुताबिक, भारत में इस साल रिकॉर्ड 116.5 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होगा और इसमें मध्य प्रदेश का योगदान 61.666 लाख टन का होगा.

होशंगाबाद में इस साल 1326.7 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्य तौर पर यहां 1249.8 मिलीमीटर बारिश होती है। हरदा में इस साल 1046.90 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्य तौर पर यहां 1004.70 मिलीमीटर बारिश होती है. सीहोर में सामान्य बारिश 1029 मिलीमीटर के मुकाबले इस साल 1145.2 मिलीमीटर बारिश हुई. विदिशा में 1385.9 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्य तौर पर यहां 984.5 मिलीमीटर बारिश होती है. रायसेन में इस साल 1406.70 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्य तौर पर यहां 1086.20 मिलीमीटर बारिश होती है।

”हम मानते है कि कुछ इलाकों में सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है, पर इस साल सितंबर तक कुछ जिले में लगातार हुई बारिश के बावजूद हमें 62 लाख टन सोयाबीन पैदावार का अनुमान है. भारत में इस साल रिकॉर्ड 116.5 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होगा और इसमें मध्य प्रदेश का योगदान 61.666 लाख टन का होगा.”
राजेश अग्रवाल (अध्यक्ष, सोपा)

”ज्यादा पैदावार से भावों पर असर पड़ता है. सीजन के शुरुआत में भाव मंदे ही रहते आए है. किसान जब माल बेच कर बाहर हो जाएंगे तब बाजार सटोरियों के हाथ में आ जाते है. साथ ही विदेशी बाजारों के सहारे भाव तान दिए जाते हैं. इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है.”
मुरली खंडेलवाल (ब्रोकर)

”बारिश के कारण हमारी फसल खराब हो गई है. फसल की लागत भी नहीं मिल पा रही है. अब अगर सरकार से मुआवजे की दरकार है.”
बंटी प्रजापत (किसान)

 

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