नई दिल्ली, 31 जनवरी. लोक सेवक पर केस के लिए गाइडलाइंस का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी लोक सेवक पर केस चलाने के लिए गाइड लाइंस बनाने की जरूरत है. पब्लिक सर्वेंट पर केस की इजाजत के लिए तीन महीने का सुझव जस्टिस गांगुली ने दिया.

केस की इजाजत के लिए अधिकतम 4 महीने में होने चाहिए. कोर्ट ने कहा कि संसद समय सीमा तय करे. सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए आज कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत शिकायत दर्ज कराना एक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है तथा सक्षम प्राधिकारी को मंजूरी देने पर एक समयसीमा के भीतर निर्णय करना चाहिए. सुको की दो न्यायाधीशों की पीठ ने एक याचिकाकर्ता की ओर से मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए दायर याचिका पर कहा कि यदि चार महीने के भीतर मंजूरी प्रदान नहीं की जाती है तो मान लिया जाना चाहिए कि मंजूरी प्रदान कर दी गई है.

यह याचिका प्रधानमंत्री को यह निर्देश देने के लिए दायर की थी वह तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी प्रदान करें. न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्राप्त करने का आधार है. पीठ ने कहा कि मंजूरी एक समयसीमा के भीतर प्रदान की जानी चाहिए और सक्षम प्राधिकारी को इस संबंध में वर्ष 1996 के विनीत नारायण मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा तय दिशानिर्देशों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए. अलग फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति गांगुली ने भी न्यायमूर्ति सिंघवी से सहमति जताते हुए कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी चार महीने के भीतर निर्णय करने में असफल रहता है तो यह मान लिया जाएगा कि इसे प्रदान कर दिया गया है. पीठ ने कहा कि लोकसेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत शिकायत दर्ज कराने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है. पीठ ने कहा कि वह प्रधानमंत्री कार्यालय के रुख का बचाव करते हुए अटॉर्नी जनरल की ओर से पेश कुछ दलीलों को स्वीकार नहीं कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर उस याचिका पर 24 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी उस याचिका पर निर्णय करने में विलंब हुआ जिसमें उन्होंने राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान करने की मांग की थी . याचिकाकर्ता ने इस मामले में प्रधानमंत्री को इस मामले में तीसरा पक्ष बनाया था. उन्होंने शुरू में प्रधानमंत्री को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी प्रदान करने के संबंध में निर्णय करें. हालांकि याची ने बाद में इस मुद्दे पर दिशानिर्देश तय करने का अनुरोध किया क्योंकि राजा के दूरसंचार मंत्री पद से 14 नवम्बर 2010 को त्यागपत्र देने के बाद उनकी याचिका निष्फल हो गई थी.

मनमोहन सरकार का ‘गाल लाल’ : भाजपा

भाजपा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मनमोहन सरकार को तमाचा है.  पार्टी  ने  सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें सरकार के समक्ष भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए तीन महीने के भीतर मंजूरी देने की समय सीमा निर्धारित की गई है. भाजपा के वरिष्ठ नेता बलबीर पुंज ने कहा, भाजपा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है. यह निर्णय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के चेहरे पर तमाचा है. इसे सरकार के लिए दूसरा बड़ा झटका बताते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले मुख्य सतर्कता आयुक्त के रूप में पी. जे. थॉमस की नियुक्ति रद्द कर दी. उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ऐसे लोगों को कानून की जद में लाने में मदद मिलेगी.

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