नई दिल्ली, 14 अप्रैल. चुनाव सुधार करने में एक के बाद एक सरकार की विफलता से खफा मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शुक्रवार को इस संबंध में पत्र लिख कर उनसे सुधार प्रक्रिया को गति देने में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

कुरैशी ने सिंह को लिखे पत्र में चुनाव आयोग द्वारा सुझाए गए चुनाव सुधारों में से अपराधियों को चुनाव लडऩे से रोकने और चुनाव में धन बल की भूमिका पर अंकुश लगाने का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि धन बल पर रोक लगाने के लिए राजनीतिक दलों के खर्च में पारदर्शिता लाई जाए और उनके खातों का लेखा जोखा कराया जाए। उन्होंने तीन भिन्न श्रेणियों में मुख्य चुनाव सुधारों को सूचीबद्ध किया है। इनमें से कुछ सुधारों के लिए संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी। कुछ के लिए जन प्रतिनिधि कानून में बदलाव करना होगा तो कुछ के लिए नियमों में संशोधन लाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इनके अलावा बहुत से ऐसे सुझाव हैं जिन्हें कानून एवं न्याय मंत्रालय के जरिए ही महज़ नियमों में बदलाव करके किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने 1998 में चुनाव सुधारों का प्रस्ताव किया और नवंबर 1999, जुलाई 2004 व अक्तूबर 2006 में उन्हें  दोहराया .

लेकिन आज तक सुधार नहीं हुए। आज के पत्र में उन्होंने उम्मीद जताई कि ये सुधार शीघ्र कर लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि प्रधानमंत्री हमेशा से ही चुनाव सुधार के समर्थक रहे हैं और वह सुनिश्चित करेंगे कि लंबित चुनाव सुधार जल्द ही किए जाएं। कुरैशी ने शीघ्र चुनाव सुधार करने के बारे में एक के बाद एक सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति पर सवाल उठाया और इस मामले में प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के लिए उन्हें पत्र लिखा। पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने दो साथियों यानी चुनाव आयुक्तों की भी पैरवी की।

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