लखनऊ, 3 अप्रैल. चुनावी नतीजों के करीब एक माह बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस को मिली पराजय की पड़ताल शुरू कर दी है. इसके लिए सांसदों व विधायकों के अलावा दूसरे एवं तीसरे स्थानों पर रहें उम्मीदवारों को पांच व छह अप्रैल को दिल्ली तलब किया है.

निकाय निर्वाचन निकट देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन दुरुस्त करने की कवायद शुरू की है. संगठन का ओवरहालिंग भी होना है. राहुल गांधी ने कमान खुद संभाल ली है. खामियों की जानकारी लेने को दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेसियों का दो दिन जमावड़ा होगा. विधायकों के अलावा सांसदों को भी बुलावा भेजा गया है. इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में एक लाख और विधानसभा में 20 हजार वोट पाने वाले उम्मीदवारों से भी पूछताछ होगी. सूत्रों के मुताबिक पहले दिन पांच अप्रैल को विधायकों व सांसदों की बैठक होगी. इसके बाद छह को हारे हुए उम्मीदवारों की शिकायतें सुनी जाएगी. माना जा रहा है कि संगठन में बदलाव की भूमिका तैयार की जा रही है. अध्यक्ष से लेकर प्रभारी के दायित्व बदले जाएगें. जिन जिला व शहर कमेटियों की शिकायतें मिली है, उनकी जांच कराकर कार्रवाई होगी. इसके बाद युवा कांग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और अन्य फ्रंटल संगठनों की समीक्षा भी होगी.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इलाहाबाद में कल

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा चार अप्रैल को इलाहाबाद में आयोजित सम्मान समारोह में भाग लेंगे. मीडिया सचिव विजय सक्सेना ने बताया कि समारोह में प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी शमिल होंगी. बहुगुणा का सम्मान समारोह में लखनऊ में भी पांच अप्रैल को आयोजित किया जाएगा.

प्रदेश संयोजक नियुक्त
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन मारूफ खान ने लखनऊ की निवासी अलका चतुर्वेदी को प्रदेश संयोजक नियुक्त किया है.

कांग्रेस का ममता बनर्जी के खिलाफ आंदोलन

कोलकाता  अब पुस्तकालयों में अल्पज्ञात 13 अखबार रखने के मुद्दे पर बंगाल कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भंट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मंशा जता दी थी. सरकार अपना फैसला नहीं बदलती है तो ब्लॉक स्तर से आंदोलन छेड़ा जाएगा.

वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश मिश्रा ने आंदोलन छेड़े जाने के कार्यक्रम की पुष्टि की है. बंगाल सरकार में शामिल कांग्रेस शुरू से इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के खिलाफ है. प्रदेश अध्यक्ष ने इसे सरकार का अनुचित निर्णय करार दिया है. वामपंथी दल और भाजपा पहले से ही इस मसले पर मुखर हैं. विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्रा ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश बताया है, वहीं भाजपा ने सोमवार को मौन जुलूस निकालकर निर्णय पर विरोध जताया. सरकार को अदालत में भी कानूनी लड़ाई से जूझना पड़ रहा है. कलकत्ता हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं. बुद्धिजीवियों ने भी सरकार के कदम को अनुचित बताया है. सरकार पर चौतरफा हमले हो रहे हैं, हालांकि वह अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

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