झारखंड राज्य की सीमा में हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस में आग लग जाने की दु:खद घटना हो गई. इसमें 7 लोग जल के मर गये. घटना रात के ढाई बजे हुई, जिस समय सभी यात्री सोये हुए थे. यह इस साल में होने वाली 7वीं बड़ी घटनाओं में से एक है. रात के कारण आग लगना एकदम से महसूस नहीं किया जा सका और चलती रेल की तेज रफ्तार में तेज हवाओं में आग पलक झपकते ही फैल गई. एक मुसाफिर द्वारा चेन खींचने से गाड़ी रुकी और आग और ज्यादा डिब्बों तक नहीं फैल पाई. कारणों की जांच में तथ्य उजागर होंगे.

सरसरी तौर पर यह अनुमान लग रहा है कि आग एक वातानुकूलित डिब्बे में शुरु हुई और बहुत जल्दी ही दूसरे वातानुकूलित डिब्बे तक जा पहुंची. इसका एक कारण शार्ट सर्किट हो जाना लग रहा है. डिब्बों में गैस सिलेन्डर में विस्फोट हो जाना भी कहा जा रहा है. यदि ऐसा ही हुआ है तो यह अनुमान भी हो रहा है वह सिलेन्डर किसी रेल अधिकारी या कर्मचारी का होगा जो उसे ले जा रहा होगा अन्यथा डिब्बों में सभी ज्वलनशील पदार्थों को ले जाने पर सख्ती से पाबंदी है. वह किसी मुसाफिर का नहीं होगा या उसने कुछ भेंट देकर डिब्बे में रख लिया होगा. वहीं इस विस्फोट के कारण रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी को यह संदेह है कि यह सेबोटाज भी हो सकता है और कोई विस्फोटक का प्रयोग हुआ होगा. झारखंड में नक्सली काफी सक्रिय हैं और ट्रेनों पर ऐसे हमलों, रेल पटरियों को उठाने की ऐसी घटनाएं करते रहते हैं. एक मुसाफिर के अनुसार गोमोह स्टेशन पर दो संदेहास्पद व्यक्ति डिब्बे में आये थे और उन्होंने एक खाली बर्थ पर बेग रखे. कुछ ही मिनटों के बाद उनमें से धुआं निकलने लगा.

इसी साल 10 जुलाई को उत्तरप्रदेश में फतेहपुर के निकट हावड़ा-कालका मेल पटरी से उतर गई थी, जिसमें 70 मरे व 300 घायल हुए थे. इसी दिन 10 जुलाई को ही दूसरी रेल दुर्घटना असम में रंगिया घाटापुर सेक्शन पर हुई थी. इसमें आतंकवादियों के विस्फोट से ट्रेन पटरी से उतर गई और 50 लोग घायल हुए थे. उत्तरप्रेदश के जौनपुर में अमृतसर-सियालदाह एक्सप्रेस 1 जनवरी को रेल गेट पर दो ट्रकों से भिड़ गई थी. उत्तरप्रेदश में ही 7 जुलाई को मथुरा-छपरा एक्सप्रेस एक रेल गेट पर बारात ले जा रही बस से टकरा गई. इसमें 38 मरे व 30 घायल हुए. 31 जुलाई को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में दो ट्रेनों की टक्कर में  गुवाहाटी-बंगलौर एक्सप्रेस क्षतिग्रस्त हुई. इसमें 3 मरे व 200 लोग घायल हुए थे. 13 सितम्बर को तमिलनाडु में कटमाडी स्टेशन पर एक ट्रेन सिगनल मिलने के इंतजार में खड़ी थी उसी समय पीछे से एक ट्रेन आकर उससे भिड़ गई, इसमें 10 मरे 100 घायल हुए थे.रेलवे गेट पर दुर्घटनाओं के बारे में यह नीतिगत निर्णय होना चाहिए कि सभी गेटों पर गेटमैन रखे जायेंगे. साथ बढ़ते यातायात के कारण रेलवे के हर गेट को अन्डर या ओवर बनाया जाना चाहिए. रेल गेटों पर गाडिय़ों की संख्या बढ़ जाने के कारण यातायात बहुत ज्यादा अवरुद्ध हो जाता है. आंदोलनों में रेलों का रोकना एक आम गतिविधि होती जा रही है. अब ऐसे कदम उठाने ही चाहिए कि रेलों को राजनैतिक या अन्य आंदोलनों से सुरक्षित किया जाए.

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