मध्यप्रदेश रेल समन्वय समिति गठित करने का निर्णय

भोपाल,26 अप्रैल,मध्यप्रदेश से जुड़ी रेल परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज करने और रेल अधिकारियों एवं राज्य सरकार के समन्वय से  रेल सुविधाएं बढ़ाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश रेल समन्वय समिति गठित की जाएगी .इस संबंध में आज मध्यप्रदेश से जुड़े आठ रेलमंडलों और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रथम बैठक संपन्न हुई.

मुख्य सचिव अवनि वैश्य, मुख्य सचिव कार्यालय में विशेष कत्र्तव्यस्थ अधिकारी आर. परशुराम और पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक, जबलपुर सुनील आर्य के साथ ही राज्य सरकार और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे. इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि समन्वय समिति की बैठक हर छह माह में होगी . बैठक में राज्य सीमा में रेल सुविधाएं विकसित करने के कार्य को गति देने के लिए चार उप समितियां गठित करने का निर्णय भी लिया गया . ये समितियां भूमि एवं वन, सुरक्षा, निर्माण कार्य और वित्तीय विषयों से संबंधित कार्यों का क्रियान्वयन बढ़ाने में मददगार होंगी. हर दो माह में उप समितियों की बैठकें होंगी . मई माह से ही ये सिलसिला शुरु हो जाएगा .

आज की बैठक में राज्य सरकार और रेलवे के मध्यप्रदेश से संबंधित रेल मंडलों भोपाल, रतलाम, जबलपुर, झांसी, नागपुर, इलाहाबाद और मुम्बई के रेल अधिकारी उपस्थित थे.बैठक में प्रमुख रुप से ओवरब्रिाज, अंडर व्रिज निर्माण, गेहूं और खाद, रसायन के लिए अधिक रैक उपलब्ध करवाने, रेल लाइनों के गैज परिवर्तन, प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर वीआईपी कक्ष निर्माण, रेल यात्रियों की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्थाओं और रेलयात्रा के दौरान सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में चर्चा हुई . मुख्य सचिव वैश्य ने कहा कि गत नवम्बर माह में रेलमंत्री ने भोपाल आगमन पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के साथ हुई बैठक में मध्यप्रदेश के हितों पर चर्चा हुई  थी तब प्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरुरत अनुभव की गई. रेलमंत्री एवं मुख्यमंत्री की संयुक्त बैठक में आए विभिन्न बिंदुओं पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वय समिति का गठन करने का निर्णय हुआ है . इस रणनीति के तहत  आज की बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रणा  की गई .

बैठक में मुख्य सचिव वैश्य ने कहा कि समन्वय समिति के गठन और नियमित बैठक के आयोजन से रेलवे से जुड़ी समस्याएं शीघ्र हल हो सकेंगी . विशेष रुप से रेलवे स्टेशनों के निकट अतिक्रमण, रेलवे को जल आपूर्ति, खतरनाक रेलवे लेवल क्रासिंग बंद करने और गेज परिवर्तन के लिए आवश्यक कार्रवाई को जल्दी संपादित करने में सहयोग मिलेगा .
वैश्य ने कहा कि सुविधाजनक अंडरब्रिाज  और ओवरब्रिाज  बन जाने के पश्चात दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने वाले पुराने फाटक बंद किए जाने चाहिए . इस मुद्दे पर प्रत्येक नगर और ग्रामीण क्षेत्रों की भिन्न-भिन्न  स्थिति है. स्थानीय  आवश्यकताओं और सुविधाओं को ध्यान में रखकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जरुरी निर्णय लिया जाना चाहिए . बैठक में रेल अपराधों पर नियंत्रण के संबंध में भी चर्चा हुई .

यात्रियों को बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए नई चौकियों की मंजूरी और जीआरपी को मुस्तैद रखने के बारे में विचार-विमर्श किया गया . बैठक में पश्चिम मध्य रेल जबलपुर के महाप्रबंधक श्री सुनील आर्य ने कहा कि बैठकों का आयोजन परिणाममूलक सिद्ध होगा . बैठक में भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री घनश्याम सिंह और  मध्यप्रदेश से संबंधित रेल मंडलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे . मुख्य सचिव कार्यालय के विशेष कत्र्तव्यस्थ अधिकारी आर. परशुराम ने समन्वय समिति की बैठक को श्रेष्ठ पहल बताते हुए  कहा कि मध्यप्रदेश रेल समन्वय  समिति की आगामी बैठक में मध्यप्रदेश से संबंधित विभिन्न रेल मंडलों में लंबित कार्यों की पुन: समीक्षा होगी.परशुराम ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर गेहूं उपार्जन कार्य के दृष्टिगत नए रैक प्वाइंटस आवश्यक हैं .

अपर मुख्य सचिव परिवहन एवं खाद्य अन्टोनी डिसा ने मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गेहूं, उर्वरक और अन्य वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्कतानुसार रैक उपलब्ध कराने की जरुरत बताई . प्रदेश में लोकोमेटिव  वर्कशाप, कोच वर्कशाप और व्हील रिपेयर वर्कशाप, शताब्दी एक्सप्रेस के हबीबगंज तक आने, बुंदेलखंड क्षेत्र को दक्षिण  भारत से रेल लाइन से जोडऩे के लिऐ आवश्यक कार्रवाई, दमोह -कुंडलपुर रेल लाइन सर्वे, ललितपुर-सिंगरौली एलाइन्मेंट परिवर्तन, इंदौर से बंगलौर ट्रेन, रेवाचंल एक्सप्रेस को इंदौर तक ले जाने के प्रस्ताव और अन्य मुद्दों पर बैठक में विस्तार से चर्चा हुई . बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह अशोक दास, पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे, परिवहन सचिव मनीष श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के सचिव विवेक अग्रवाल के अलावा संबंधित विभागों जैसे लोक निर्माण विभाग, वन, जल संसाधन, सामान्य प्रशासन, राजस्व आदि विभागों के प्रमुख सचिव उपस्थित थे.

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