भोपाल, 17 अक्टूबर. यूनियन कार्बाइड गैस पीडि़तों के बीच काम कर रहे पाँच संगठनों ने आज पत्रकार वार्ता में घोषणा की कि वे सभी पीडि़तों के लिए सही मुआवजे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रेल रोको आंदोलन करेंगे.

भोपाल बंद का आयोजन करने वाले संगठनों ने मांग की केन्द्र और राज्य की सरकारे सर्वोच्च न्यायालय में जल्द शुरू होने वाली सुधार याचिका में गैस काण्ड की वजह से हुई मौतों और क्षति के सही आंकड़े पेश करें. भोपाल के सभी वर्गो के पीडि़तों ने जिस शांतिपूर्ण तरीके से 11 अक्टूबर के बंद को सफल किया है उससे हमें यह विश्वास हो गया है कि इसी मांग पर हमारे अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन के आव्हान को भी पीडि़तों का व्यापक समर्थन मिलेगा. कहती है भोपाल गैस पीडि़त महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी.

संगठनों ने पत्रकार वार्ता में 93 प्रतिशत गैस पीडि़तों को उनके मुआवजे के हक से वंचित करने के मुद्दे पर पिछले एक साल में उनके द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी गई चिट्ठयों की प्रतिलिपियां पेश की. हम सिर्फ यह मांग कर रहे है कि उलजलूल आंकड़ों के स्थान पर सरकार गैस काण्ड की वजह से स्वास्थ्य को पहुँची क्षति और मौतों के आकड़े पेश करने में भारतीय गैस पीडि़त महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खा. संगठनों के अनुसार ई.सी.एम.आर. द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि बहुसंख्यक गैस पीडि़तों को अस्थाई नहीं बल्कि स्थाई क्षति पहुँची है और यह भी गैस की वजह से हुई मौतों की संख्या वर्तमान सरकारी आंकड़ों से पाँच गुना ज्यादा है.

भोपाल ग्रुप फार इन्फार्मेशन एण्ड एक्शन के सतीनाथ षडंग़ी ने बताया कि सुधार याचिका में गैस जनित मौतों और शारीरिक नुकसान के आंकड़ो को सुधारने के लिए उनके संगठन सरकारको एक महीने का समय दे रहे है जो कि इस काम के लिए आवश्यकता से अधिक है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि केन्द्र और प्रदेश सरकारी के संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित कदम उठाया जाएगा. भोपाल गैस पीडि़त निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव ने सही मुआवजे से वंचित सभी पीडि़तों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे जा रहे ज्ञापन से जुडऩे की अपील की. उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों में केन्द्र और प्रदेश की सरकारों को सौंपे जाने वाले इन आवेदनों पर अब तक 10,000 से अधिक पीडि़त हस्ताक्षर कर चुके है.

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