गंभीरता से केस नहीं लडऩे वाले सरकारी वकील हटाये जायेंगे: मुख्यमंत्री

भोपाल, 12 अक्टूबर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि महिलाओं के प्रति गंभीर अपराधों को चिन्हित अपराधों की श्रेणी में रखा जायेगा. ऐसे प्रकरणों की विवेचना तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में विलम्ब रोका जायेगा. बेटियों के प्रति सामाजिक सोच बदलने का अभियान लगातार जारी रहेगा. अधिकांश शासकीय नौकरियों में 50 प्रतिशत स्थान बेटियों के लिये आरक्षित किये जाने पर विचार होगा वहीं लाड़ली लक्ष्मी जैसी महिला सशक्तिकरण की अन्य सभी योजनायें प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जायेगी.

चौहान आज यहां उच्च स्तरीय बैठक में महिलाओं के विरूद्ध अपराध पर अपेक्षित कानूनी आवश्यकता की समीक्षा कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि बलात्कार जैसे घृणित अपराध की सजा मृत्युदण्ड हो. इसके लिये केन्द्र से कानून परिवर्तन की मांग की जायेगी. बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रसव से पहले लिंग परीक्षण कर भ्रूण हत्या जैसे मामलों तथा महिलाओं के विरूद्ध अपराधों पर वर्तमान कानूनों की स्थिति तथा नये कानूनी प्रावधानों के बारे में व्यवहारिक सुझाव देने के लिये उच्च स्तरीय समिति गठित की जायेगी. इस समिति में कानूनविद, सामाजिक कार्यकर्ता, पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे.

गंभीरता से केस नहीं लडऩे वाले, सरकारी वकील हटाये जायेंगे
चौहान ने चिन्हित सनसनीखेज अपराधों पर की जा रही कार्रवाई की समीक्षा करते हुये कहा कि ऐसे सरकारी वकील जो प्रकरणों की न्यायालयों में गंभीरता से पैरवी नहीं करते उन्हें हटाया जाय. उन्होंने निर्देश दिये कि शासकीय अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की जाय. यह देखा जाय कि उनके द्वारा प्रस्तुत कितने प्रकरणों में सजा हुयी है. ढिलाई बरतने वाले शासकीय अधिवक्ता बदले जायं.

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