नई दिल्ली। टाटा समूह में दो दशक गुजार चुक रतन टाटा ने कहा है कि एक सच्चे नेता की विरासत का लोगों पर एक अलग असर होता है और वह विरासत लोगों की जिंदगी बदल देती है। टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह अपने उत्तराधिकारी की तलाश कर रहे हैं। टाटा का उत्तराधिकारी खोजने के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है। उल्लेखनीय है कि टाटा दिसंबर, 2012 में सेवानिवृत्त होंगे।

टाटा रविवार को स्विट्जरलैंड के राजदूतों की ओर से सम्मानित होने के बाद अपने विचार रख रहे थे। टाटा के मुताबिक, वह टाटा समूह में जो कुछ भी कर सके, अकेले नहीं, बल्कि अपने लोगों की मदद से कर सके। उन्होंने कहा, मैं अपने सहकर्मियों, कंपनियों के सीईओ तथा उन लोगों का आभारी हूं जिनकी मदद से टाटा समूह में सब संभव हो सका। मैंने भी वही यात्रा की जो मेरे पूर्वजों ने की।  रतन टाटा को उद्योग जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्विस अंबेसडर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। भारत में स्विट्जरलैंड के राजदूत फिलिप वेल्ती ने टाटा को कल यह अवार्ड प्रदान किया। भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक कारोबार में रतन टाटा के योगदान की सराहना करते हुए वेल्ती ने कहा, स्विट्जरलैंड के आर्थिक स्तंभों में से एक स्तंभ भारत में इसका प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है। लेकिन स्विट्जरलैंड में टाटा समूह के निवेश के साथ भारत से विदेश में एफडीआई का युग शुरू होता प्रतीत हो रहा है। टाटा ने एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जाब्स को असाधारण नेतृत्व क्षमता का धनी बताते हुए कहा कि जाब्स एक बड़ा उद्यमी बनने की कोशिश करने के बजाय कुछ अलग करने में लगे रहे जिसने करोड़ों लोगों की जिंदगी ही बदल दी।

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