नई दिल्ली, 17 अक्टूबर. लालकृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा को विरोधियों की अपेक्षा अपनों के कारण ही आलोचना झेलनी पड़ रही है. भ्रष्टाचार और कालेधन से जुड़े मुद्दे को लेकर देशभर में जनजागरण पर निकले शीर्ष नेता का रथ भाजपा शासित राज्यों के भ्रष्टाचार के आरोपों के दलदल में फंसता जा रहा है. उसपर से सतना में भाजपा नेताओं की पत्रकारों को जो पैसा दिया गया उससे इस अभियान की और किरकिरी हुई है.

जनचेतना यात्रा पर निकले भाजपा के शीर्ष नेता अपनों के तिकड़म से परेशान आडवाणी ने अपने दर्द को अपरोक्ष तौर पर व्यक्त कर दिया है. लेकिन राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि इस यात्रा में अभी कितने और मुद्दे उछलेंगे यह तो समय बताएगा क्योंकि अभी उत्तराखंड, झारखंड व छत्तीसगढ़ बाकी है. जहां की सरकारों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं. उल्लेखनीय है कि यात्रा से पहले संघ की हरी झंडी लेने के लिए जहां आडवाणी को संघ मुख्यालय तक जाना पड़ा. वहीं यात्रा को प्रधानमंत्री पद से जोड़कर देखे जाने के बाद उन्हें सफाई तक देनी पड़ी. विवाद यही नहीं थमा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और आडवाणी में शीतयुद्ध तक की अटकलें लगाई जाने लगी जिसके बाद आडवाणी को एक और सफाई पेश करते हुए कहना पड़ा कि मोदी से उनका मतभेद नहीं. इतना ही नहीं यात्रा की शुरूआत तो हो गई लेकिन मध्यप्रदेश पहुंचने से पहले नोट कांड का विरोध करने वाले आडवाणी को अपने नेताओं द्वारा पत्रकारों को नोट देने के मामले पर सफाई देनी पड़ी. इतना ही नहीं आडवाणी की यात्रा की रही सही कसर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा की गिरफ्तारी ने पूरी कर दी है.

अपने पार्टी के नेताओं से क्षुब्ध आडवाणी को कहना पड़ा कि आज उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री व पार्टी के वरिष्टतम नेता अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन की कमी खल रही है. हालांकि उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू करने से पहले वे वाजपेयी का आशीर्वाद लेने गए थे. हालांकि राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि अभी आडवाणी की यात्रा में और भी बहुत मुद्दे उछलने बाकी हैं क्योंकि अभी महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित कई राज्य बाकी हैं. प्रेक्षकों का कहना है कि सबसे ज्यादा उत्तराखंड व झारखंड में आडवाणी को परेशानी होगी. क्योंकि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा था. वहीं झारखंड में  भ्रष्टाचार का आरोप आम है. इतना ही नहीं झारखंड सरकार पर विपक्ष द्वारा भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए जा चुके हैं.

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