• विवाद के बाद सरकार का फैसला

दिल्ली, 3 अक्टूबर. ग्रामीण विकास मंत्रालय और योजना आयोग गरीबी रेखा की परिभाषा बदलने पर सहमत हो गए हैं। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर 32 रु. रोज खर्च करने वाले को गरीबी रेखा के ऊपर माना था। इसपर विवाद बढऩे पर अब नई गरीबी रेखा खींचने को लेकर योजना आयोग और सरकार के बीच सहमति बन गई है।

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने इसका ऐलान किया। सरकारी कार्यक्रमों के निर्धारण में योजना आयोग की गरीबी की परिभाषा का फिलहाल इस्तेमाल नहीं होगा। यानि योजना आयोग ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के लिए जो बातें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कही थीं उनको आधार नहीं बनाया जाएगा। सबसे पहले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय रजिस्ट्रार जनरल की मदद से सभी ग्रामीण घरों का सर्वे करेगा।

सर्वे के बाद रिपोर्ट जनवरी 2012 तक तैयार होगी। यानि जनवरी 2012 के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय के सर्वे के बाद ही गरीबी रेखा का नया आधार बनाया जाएगा। एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाएगी जो गरीबी रेखा का निर्धारण करेगी। अहलूवालिया ने कहा कि आयोग की कभी ये मंशा नहीं रही कि वो गरीबों की संख्या घटाने के लिए किसी फॉर्मूले की मदद ले या सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या सीमित करे।
उस पर लगने वाले ये आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आयोग का हलफनामा सिर्फ कोर्ट की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में था।

काम आया राहुल का दबाव

कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ वाले लोकलुभावन राजनीतिक नारों को अप्रत्यक्ष रूप से खारिज करने वाला योजना आयोग अब अपने रूख में परिवर्तन करने को तैयार हो गया है. सूत्रों की माने तो पक्ष व विपक्ष के चौतरफा दबाव के साथ-साथ कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के व्यक्तिगत सुझाव के बाद ही सरकार ने अपने रूख में बदलाव करने का संकेत दिया है.

विरोध में न सिर्फ विपक्षी दलों के नेता बल्कि कई वरिष्ठ कांगे्रसियों साथ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के कई सदस्यों ने भी खुलकर मोर्चा खोल रखा था. कांगे्रस के लोग औपचारिक तौर पर योजना आयोग के निर्णय को अव्यवहारिक करार देते हुए इसे पार्टी की सोच के विपरित बता रहे हैं. सूत्रों की माने तो उत्तरप्रदेश चुनाव में विरोधियों की ओर से प्रत्यक्ष तौर पर इसे मुद्दा बनाए जाने के डर से कांगे्रसी नेताओं ने पार्टी के विभिन्न फोरम पर दबाव बनाना आरंभ कर दिया था. कांगे्रस कोर कमेटी में भी इसके बारे में पिछले दिनों चर्चा हुई थी और कमेटी के ज्यादातर सदस्यों ने योजना आयोग के आंकलन को तथ्यपरक नहीं माना था. इसके बाद पिछले दिनों राहुल गांधी ने ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से बातचीत की थी. समझा जाता है कि श्री गांधी के व्यक्तिगत दबाव व पार्टी नेताओं के सुझाव के कारण ही योजना आयोग ने अपने रूख में परिवर्तन किया है. रविवार रात में योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह आहूलवालिया ने प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से मुलाकात कर आयोग की ओर से सफाई पेश की .

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