नई दिल्ली, 20 फरवरी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कृषि क्षेत्र में 4 प्रतिशत अथवा इससे अधिक वृद्धि दर हासिल करने की जरूरत पर जोर देते हुए सोमवार को कहा कि सरकार 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस क्षेत्र में शोध एवं विकास पर होने वाले खर्च को कम से कम दोगुना करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

कृषि क्षेत्र में शोध एवं विकास पर मौजूदा खर्च सकल घरेलू उत्पाद  का करीब एक प्रतिशत है। भारतीय कृषि शोध संस्थान के स्वर्ण जयंती सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 11वीं योजना में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। हालांकि उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में वृद्धि दर को 4 प्रतिशत या उससे अधिक करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजनावधि (वर्ष 2007 से 2012) के दौरान कृषि वृद्धि दर करीब 3.5 प्रतिशत रहने की संभावना है जो 10वीं योजनावधि के वृद्धि दर के मुकाबले काफी बेहतर है। यह सराहनीय उपलब्धि है लेकिन हमें 12वीं योजनावधि में इसे सुधारकर 4.0 प्रतिशत या उससे अधिक करने की ओर जोर देना होगा। दसवीं योजनावधि के दौरान कृषि क्षेत्र में सुस्ती रही और वृद्धि दर मात्र 2.5 प्रतिशत रही। सिंह ने कहा कि अधिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए केन्द्र के अलावा राज्य सरकारों को भी दृढ़ प्रयास करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि अधिक विकास दर हासिल करने के लिए कृषि शोध पर ध्यान देना काफी अहम है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि शोध प्रणाली को सुदृढ़ किये जाने की आवश्यकता है।

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