भोपाल. मध्य प्रदेश में गरीबों की स्थिति में बदलाव आ रहा है। बीते पांच सालों में राज्य के गरीबों की संख्या में 12 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इससे 13 लाख परिवार ऐसे हैं, जिन्हें गरीबी की तोहमत से मुक्ति मिली है।

योजना आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1993-94 से वर्ष 2004-05 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी में सात प्रतिशत की कमी आई। वर्ष 2004-05 से 2009-10 तक पांच सालों में राज्य की गरीबी 48.6 प्रतिशत से गिरकर 36.7 प्रतिशत रह गई। इस प्रकार राज्य की गरीबी में 12 फीसदी की कमी दर्ज की गई। योजना आयोग के वर्ष 2009-10 के प्रदेश में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से गरीबी कम हुई है। यह उपलब्धि सिंचाई सुविधाओं एवं कृषि उत्पादकता में वृद्धि, ग्रामीण योजनाओं के क्रियान्वयन, राज्य सरकार द्वारा गरीबी के खिलाफ चलाए गए अभियान से मिली है।

प्रदेश महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में देश में तीसरे स्थान पर है। आंकड़ों पर गौर करें तो तो पता चलता है कि वर्ष 2004-05 से वर्ष 2009-10 तक पांच वर्ष के दौरान प्रदेश में लगभग 13 लाख परिवार गरीबी से ऊपर आए। इन परिवारों के सदस्यों की संख्या लगभग 54 लाख है। इसके विपरीत वर्ष 1993-94 और वर्ष 1999-2000 के बीच गरीबी रेखा से नीचे की जनसंख्या 53 लाख 40 हजार बढ़ी थी। वर्ष 1993-94 में गरीबी रेखा से नीचे की आबादी दो करोड़ 19 लाख सात हजार थी, जो वर्ष 1999-2000 में बढ़कर दो करोड़ 61 लाख 66 हजार हो गई थी। विशेषज्ञों का मत है कि वर्ष 2011-12 में जो सर्वे हो रहा है, उसमें मध्य प्रदेश में निश्चित रूप से गरीबी में कमी देखने को मिलेगी। यह उम्मीद इसलिए की जा रही है क्योंकि इस वर्ष अच्छी और सामान्य वर्षा हुई है।

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