नई दिल्ली, 15 मार्च. सरकार ने वित्त वर्ष 2011-12 के लिए एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) सेविंग्स पर 8.25 फीसदी की ब्याज दर तय की हैं. इससे कई महीनों से चली आ रही अनिर्णय की स्थिति खत्म हो गई है. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले सरकार ने ईपीएफ की ब्याज दरें 1.25 फीसदी घटाई हैं. सरकार के इस फैसले से करीब 6 करोड़ कर्मचारियों को अपने रिटायरमेंट सेविंग्स पर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और दूसरी छोटी बचत योजनाओं के मुकाबले कम ब्याज से संतोष करना पड़ेगा.

श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) ने आम बजट से दो दिन पहले बुधवार को कम ब्याज दरों की घोषणा की. वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ सेविंग्स पर 8.25 फीसदी से ज्यादा ब्याज देने से इनकार कर दिया था. पिछले वित्त वर्ष में ईपीएफ की ब्याज दर 9.5 फीसदी थी, जिससे अबकी बार 125 बेसिस पॉइंट घटाया गया है. यह पिछले एक दशक में की जाने वाली सबसे बड़ी कटौती है. ईपीएफओ के फाइनैंशल अडवाइजर राजेश बंसल ने बताया, च्श्रम मंत्रालय ने हमें सूचित किया है कि वित्त वर्ष 2011-12 के लिए 8.25 फीसदी की दर घोषित की गई है.ज् ईपीएफ सेविंग की ब्याज दरें घटाए जाने के बारे में सीपीएम के एमपी तपन सेन ने कहा, च्यह आम आदमी के साथ धोखा है. हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे.ज

दिसंबर 2011 में श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खडग़े की अगुवाई वाले ईपीएफओ बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने 8.25, 8.5 और 9.5 फीसदी- इन तीन ईपीएफ रेट्स की सिफारिश की थी और अंतिम फैसला वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर छोड़ दिया था. श्रम मंत्रालय ने ईपीएफ की ब्याज दरें पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) डिपॉजिट के रिटर्न के बराबर 8.6 फीसदी रखने के लिए खासी मशक्कत की थी. सरकार ने 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों तक ईपीएफ की ब्याज दरों पर अंतिम फैसले को रोक रखा था. लेकिन अब उसने सबसे कम प्रस्तावित ईपीएफ रेट्स पर मुहर लगाई है. वित्त वर्ष 2010-11 में ईपीएफ रेट्स को 8.5 फीसदी से बढ़ाकर 9.5 फीसदी कर दिया है. इसकी वजह यह थी कि ईपीएफओ ने दावा किया था कि उसे पास 1,700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त रिजर्व है.

Related Posts: