इस बार 17 अप्रैल को रिजर्व बैंक द्वारा 0.50 प्रतिशत की कमी उम्मीद से ज्यादा रही. उद्योगपति श्री राहुल बजाज ने कहा कि आर्थिक जगत को यह आशा थी 25 बेसिक पाइंट तक कमी हो सकती है, लेकिन इसका 50 तक हो जाना निश्चित ही उम्मीद से ज्यादा है. रिजर्व बैंक मार्च 2010 से अक्टूबर 2011 तक ब्याज दरों को महंगा करता गया था. इसका औद्योगिक निवेश व विनिर्मित (मेन्युफेक्टिंग) पर इतना बुरा प्रभाव पड़ा कि वे घट कर 6.5 प्रतिशत तक आ गया था.

ब्याज दरों में वृद्धि में पूंजी इतनी महंगी हो गई कि निवेशकों ने उनके हाथ खींच लिए. केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने उम्मीद जताई है कि ब्याज दरों में कटौती करने निवेश में काफी वृद्धि होगी. अब ब्याज दरें घटकर 8 प्रतिशत पर आ गई हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि विकास दर 9 प्रतिशत तक बढ़ जायेगी. रिजर्व बैंक पिछले दो बार से अपनी तिमाही समीक्षा… में सी.आर.आर. (केश रिजर्व रेशो) में भी कटौती करता आया है, लेकिन इस बार उसे यथावत् 4.75 प्रतिशत पर ही रखा गया है.

जहां उपभोक्ता क्षेत्र में घर और कार के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जायेगा वहीं रिजर्व बैंक ने सरकार से पेट्रो पदार्थों के मूल्य बढ़ाने को कहा है. बैंकों में जमा राशि (डिपाजिट) पर ब्याज कम हो सकता है. सावधि जमा (फिक्स डिपाजिट) पर वरिष्ठï नागरिकों को सामान्यजन से थोड़ा ज्यादा ब्याज दिया जाता है. एक ही बाजार में मुद्रा संकुचन होता है. वहीं बैंकों के पास अवधि आधारित पूंजी कारोबार के लिए बढ़ जाती है. बैंक ने यह चेतावनी भी दे दी है कि आगे भी इसी तरह ब्याज दरों में कटौती की जाने की कोई ग्यारंटी भी नहीं दी जा रही है. आम आदमी ने यह सोचा जरूर था कि 13 बार ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं तो उसे घटाने का भी ऐसा लम्बा सिलसिला चलता रहेगा. रिजर्व बैंक ने इसकी संभावना से अवश्य इंकार कर दिया है.

प्रधानमंत्री भी इन दिनों यह कह चुके हैं कि देश की अर्थव्यवस्था कठिन दौर से गुजर रही है. सरकार ने एक अजब नीति बना रखी है उत्पादन ज्यादा होने पर अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में उछाल आने के नाम पर गेहूं, चावल, शक्कर, प्याज व कपास का निर्यात शुरु कर दिया जाता है और इनकी घरेलू बाजार में मूल्य वृद्धि हो जाती है. अभी हमारी घरेलू मूल्य नीति हमारी खुद की जरूरतों पर मूल्य निर्धारित करने की नहीं है. जहां देश इन वस्तुओं का निर्यात देख रहा है वहीं उसने इन्हीं वस्तुओं शक्कर, प्याज का खुद की जरूरत के लिये आयात भी होते देखा है.
यूरो जोन में ग्रीस से उत्पन्न ऋण संकट से भी विदेशी व्यापार पर असर पड़ा है और इसमें कमी आई है. उपभोक्ता वस्तुओं कार व घर पर ब्जाय दर घटाने से ज्यादा जरूरत आम आदमी के लिए यह है कि बाजार में सामान्य जरूरतों की वस्तुओं के मूल्यों में जो बढ़ौत्री हो गई है, वह भी कम होना शुरू होनी चाहिए. ब्याज दरों से निवेश में निश्चित ही तेजी आयेगी लेकिन मूल्यों में परिलक्षित नहीं हो रही है. पिछली 13 बढ़ौत्रियों से निवेश इसलिये भी कम हुआ कि लोगों ने उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए सोने में निवेश बढ़ाया. सरकार गोल्ड लोन को कम कर रही है जिससे सोने का आयात कम हो सके.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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