रिजर्व बैंक का फैसला सही-बसु

नई दिल्ली . निवर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए मुख्य नीतिगत ब्याज दरों में कटौती नहीं करने के भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले को  सही कदम’ ठहराते हुए आज उम्मीद जताई कि मुद्रास्फीति सितंबर में घटकर सात प्रतिशत से नीचे आ जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार अपरिवर्तित रखने का फैसला आज किया।

बसु ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा,  मेरी अपेक्षा है कि सितंबर के महीने में मुद्रास्फीति सात प्रतिशत से नीचे चली जाएगी।  केंद्रीय बैंक ने हालांकि सांविधिक तरलता अनुपात यानी एसएलआर को एक प्रतिशत घटाकर 23 फीसदी कर दिया है। एसएलआर व्यवस्था के तहत वाणिज्यिक बैंकों को अपने पास जमा राशि का एक न्यूनत हिस्सा ऐसी सरकारी प्रतिभतियों में निवेश करना अनिवार्य है जिन्हें किसी भी समय भुनाया जा सकता है।   केंद्रीय बैंक ने सही कदम उठाया है और एसएलआर में कमी छोटा ही सही, महत्वपूर्ण कदम है जो बाजार को सही दिशा देगा। आर्थिक वृद्धि दर के सवा पर उन्होंने कहा कि दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है . और मौजूदा वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: में गिरावट के ही आसार है।  चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जून और जुलाई-सितंबर की पहली दो तिमाहियों में जीडीपी वृद्धि छह प्रतिशत से नीचे रहेगी।

रिजर्व बैंक के कदम से निराश उद्योग – एसोचैम

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पहली तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख दरें अपरिवर्तित रखे जाने से उद्योग जगत ठगा सा महसूस कर रहा है। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि रिजर्व बैंक के इस कदम से उद्योग जगत निराश है क्योंकि इससे आर्थिक वृद्धि दर में और नरमी आएगी। एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, ‘गिरती आर्थिक वृद्धि दर के मौजूदा परिदृश्य में उच्च मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा जो नीतिगत रुख अपनाया गया है वह सही कदम नहीं है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने लंबे समय से अटके पड़े आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया है।’ ‘एसएलआर में एक प्रतिशत की कमी किया जाना एक सकारात्मक कदम है जिससे बैंकों के पास नकदी बढ़ेगी। इस बीच, कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रानिल पान ने कहा, ‘जैसा कि हमें अनुमान था, रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया और इसका जोर मुख्य रूप से मुद्रास्फीति को नियंत्रण में लाने पर था।

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