छतरपुर. 30 मार्च.  30 मार्च नससे क्या 1 अप्रैल से प्रदेश में गुटका  के  उत्पादन  और  बिक्री   पर  प्रतिबंध  लग जाएगा? इस आशंका  के  चलते  जहां  गुटका खाने  वालों  की नींद  उड़ी  है  वहीं  करोड़ों  का व्यापार  करने  वालों  की  बल्ले-बल्ले  हो  रही  है.

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2011 की धारा 2,1, 3  के  अनुसार इवे प्रतिबंधित माना गया है. क्योंकि खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्रशासन ने भी इस तरह के खाद्य पदार्थ बनाने वाली फैक्ट्रियों, कंपनियों, थोक, रिटेल व फुटकर दुकानदारों को एक अप्रैल से नया लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन देने या रिन्यू करने से इनकार कर दिया गया है. गुटका की बिक्री की खबर प्रकाश में आते ही छतरपुर में भी हड़कंप जैसी स्थिति बन गई है. खबर के तत्काल बाद से बाजार में गुटका मंहगा हो गया है तथा फुटकर दुकानदारों को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार निर्णय के बाद से गुटका होलसेल डीलरों ने पूरा माल भूमिगत कर दिया है. माना जा रहा है कि  अब कालाबाजारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है. प्रशासन की कार्रवाई होने में देर लगने की  संभावना पर व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में गुटका स्टोर कर लिया है. माना जा रहा है कि 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री का छतरपुर आगमन हो रहा है, इसके चलते प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है. यही दिन होंगे जब व्यापारी रातों-रात लाखों का मुनाफा कमा लेगे. वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अभी तक लिखित में ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि गुटका की बिक्री और उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जब तक आदेश आएगा, इसके पहले कालाबाजारी अपना व्यवसाय कर चुके होंगे. शुक्रवार को कई फुटकर दुकानदारों ने बताया कि उन्हें साधारण तौर पर गुटका नहीं बेचा जा रहा है.

जिसके पास पहले से माल है, उसी में काम चला रहे हैं.  हालांकि बताया गया है कि बिना तंबाकू व निकोटिन के बने सादे गुटका पाउचों के निर्माण व बिक्री पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा. ऐसा गुटका बनाने वालों को लाइसेंस दिया जा सकेगा, लेकिन कालाबाजारियों ने इसे गुटका पाउचों को भी डंप कर लिया है.

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