पेट्रोल की आपूर्ति रोकने की चेतावनी

नई दिल्ली, 2 अप्रैल. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने ईधन आपूर्ति में गड़बड़ी की चेतावनी दे दी है। तेल कंपनियों ने कहा है कि यदि उन्हें पेट्रोल के दाम बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाती है अथवा दाम नहीं बढ़ाने के कारण दैनिक 48 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई नहीं की जाती है तो ईधन आपूर्ति गड़बड़ा सकती है।

पेट्रोलियम पदार्थो की बिक्री करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन के अध्यक्ष आरएस बुटोला ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है। हमें पेट्रोल पर प्रति लीटर 7.67 रुपये का नुकसान हो रहा है, इसमें 20 प्रतिशत की दर से बिक्रीकर जोडऩे पर जरुरी मूल्य वृद्धि 9.20 रुपये लीटर हो जाती है। बुटोला ने कहा कि हमारी कुल उत्पादन लागत में 39 प्रतिशत खर्च कच्चे तेल पर होता है, जो कि हमें आयात करना होता है। यदि हमें ईधन की बिक्री से पूरा राजस्व प्राप्त नहीं होगा तो हम कच्चे तेल की और खरीदारी नहीं कर पाएंगे, यदि कच्चे तेल की खरीदारी नहीं हो सकी तो ईधन आपूर्ति में गड़बड़ी होगी। इंडियन आयल कार्पोरेशन और सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम को पेट्रोल की बिक्री पर रोजना 48 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

हालांकि, सरकार पेट्रोल के मूल्य से नियंत्रण जून 2010 में ही हटा चुकी है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से सरकार ने तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम बढ़ाने की भी अनुमति नहीं दी है। बुटोला ने कहा कि यह अजीब स्थिति है। ऐसी स्थिति जिसमें पेट्रोल की प्रति लीटर बिक्री पर उत्पाद शुल्क के रुप में केन्द्र सरकार को करीब 15 रुपये और राज्य सरकारों को 10 से लेकर 20 रुपये के बीच प्राप्त हो जाते हैं लेकिन तेल कंपनियों के हाथ कुछ भी नहीं लगता है। तेल कंपनियों ने सरकार से पेट्रोल के दाम बढ़ाने की अनुमति नहीं देने की स्थिति में नुकसान की भरपाई के लिए कहा है। इसके अलावा कंपनियों ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क दरें कम करने की भी मांग की है। हमने सरकार से साफ कह दिया है, यदि इन मांगों को नहीं माना जाता है तो तेल कंपनियों को पास दाम बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाता है। बहरहाल, इस संबंध में हमें सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। तेल कंपनियां हर पखवाड़े तेल मूल्यों की समीक्षा करती हैं।

रोजाना 48 करोड़ रुपए का नुकसान
तेल विपणन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) के अध्यक्ष आरएस बुटोला ने कहा कि लागत से कम कीमत पर पेट्रोल बेचने से तेल कंपनियों को रोजाना 48 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

एक लीटर पर 7.67 रु. घाटा
बुटोला ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कीमतों से तुलना की जाए तो वर्तमान कीमत पर एक लीटर पेट्रोल बेचने से 7.67 रुपए का नुकसान हो रहा है। इसमें 20 प्रतिशत का बिक्री कर जोड़ दिया जाए तो पेट्रोल के दाम में कम से कम 9 रुपए प्रति लीटर का इजाफा होना चाहिए।

टैक्स घटाए सरकार
तेल कंपनियों ने मांग की है कि सरकार पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स में कटौती करे। अगर टैक्स पर गौर करें, तो दिल्ली में पेट्रोल पंप पर पेट्रोल 38.42 रुपये प्रति लीटर की दर से पहुंचता है। उस पर 14.35 रुपये एक्साइज ड्यूटी और 3 पर्सेंट एजुकेशन सेस लगता है, यानी पेट्रोल की कीमत 14.78 रुपये बढ़ जाती है। इस पर डीलर कमिशन होता है 1.50 रुपए का। फिर वैट लगता है। दिल्ली में ग्राहक को कुल 65.64 रुपये देने पड़ते हैं। यह माना जा रहा है कि तेल की कीमत में बढ़ोतरी का राजनीतिक पार्टियां भी विरोध करेंगी। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलियम कंपनियों को रोजाना 670 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेल की कीमतें बढऩे से कंपनियों का पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर घाटा बढ़ गया है।

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